28 अप्रैल 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पत्रिका असरः फर्जी डिग्री बेचने वाले संचालक के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट

एक लाख में देता था एमबीए की डिग्री

2 min read
Google source verification

मेरठ

image

Iftekhar Ahmed

Jan 01, 2018

meerut fake degree

मेरठ. पत्रिका डॉट कॉम पर छपी खबर का बड़ा असर सामने आया है। पत्रिका की खबर का संज्ञान लेते हुए एसपी देहात राजेश कुमार ने एसओ किठौर राजेन्द्र त्यागी को फर्जी विश्वविद्यालय के संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। एसओ किठौर ने कार्रवाई करते हुए आरोपी नावेद अली के खिलाफ धारा 420, 468 और 471 के अंतगर्त मुकदमा दर्ज कर लिया है। गौरतलब है कि पत्रिका ने वर्ष 2017 के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर को खुलासा किया था कि मेरठ में जंगल के अंदर फर्जी डिग्रियों का बड़ा कारोबार चल रहा है। इसी के बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की।

जंगल के अंदर चल रहा था फर्जी डिग्रियों का बड़ा कारोबार, पहुंची पुलिस तो रह गई हैरान

यह था मामला

किठौर स्थित भटीपुरा के जंगल स्थित एक मकान में एएनजी के नाम से एक कॉलेज संचालित हो रहा था। इस कॉलेज की आड़ में फर्जी डिग्री बांटने का काम किया जाता था। आरोप है कि ये फर्जी डिग्रियां नावेद अली बनाता था। इस काम के लिए उसने बकायदा कुछ कम्प्यूटर ऑपरेटर रखे हुए थे, जिनसे वह इस काम को करवाता था। जंगल में बने इस भवन में कम्प्यूटर से सिंघानिया यूनिवर्सिटी, मोनार्ड यूनिवर्सिटी, जेआरएम विद्यापीठ यूनिवर्सिटी और कई अन्य डीम्ड यूनिवर्सिटीज की फर्जी मार्कशीट बनाई जा रही थी। कम्प्यूटर पर काम कर रहे लोग मौके पर पुलिस को देखकर खिड़की खोलकर जंगल की ओर भाग गए। मौके पर ग्राम प्रधान के लैटर पैड, बेसिक शिक्षा से संबंधित सरकारी आधिकारी से जुड़े कागज के साथ ही मार्कशीट बनाने में इस्तेमाल होने वाले पेपर, प्रिंटर व सॉफ्वेयर की सीडी बरामद हुई है। पुलिस के हत्थे एकमात्र कंप्यूटर ऑपरेटर ही चढ़ पाता। जिससे यहां चल रहे गोरखधंधे के बारे में खुलासा किया।


एक लाख में एमबीए की डिग्री
संचालक पुलिस की गिरफ्त से अभी तक बाहर है, लेकिन पकड़े गए ऑपरेटर की माने तो यहां पर एक लाख रूपये में एमबीए की डिग्री मिलती थी। इसके अतिरिक्त पीएचडी की मार्कशीट और डिग्री ऑन डिमांड तैयार की जाती थी। पीएचडी की मार्कशीट और डिग्री 50 हजार रूपए से डेढ लाख तक में मिलती थी। ग्रेजुएशन की मार्कशीट बीस हजार रूपये से पचास हजार रूपये में बेची जाती थी।


संचालक पुलिस गिरफ्त से दूर
पुलिस ने संचालक नावेद के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज कर ली, लेकिन वह अभी पुलिस की गिरफ्त से काफी दूर है। बताया जा रहा है कि वह राजस्थान में छिपा हुआ है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए जानी स्थित घर पर दबिश दी, लेकिन वहां पर उसके परिजनों से भी पुलिस को कोई खास जानकारी हासिल नहीं हो सकी।

बड़ी खबरें

View All

मेरठ

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग