मेरठ

वेस्ट यूपी में जाट-मुस्लिम के नए समीकरण से भाजपा को तगड़ा जवाब देने की तैयारी रालाेद की!

रालोद के राष्ट्रीय महासचिव डा. मैराजुद्दीन ने कहा- भाजपा ने जाटों से वोट तो ले लिए, लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया  

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Mar 24, 2018
meerut

केपी त्रिपाठी, मेरठ। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद वेस्ट यूपी में जाट-मुस्लिम समीकरण को फिर से एक करने की कोशिश की जा रही है। यह पहल कोई नहीं जाट की पार्टी कहलाने वाली राष्ट्रीय लोकदल की तरफ से यह पहल हो रही है। 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से जाटों व मुस्लिमों के बीच पैदा हुई खाई पाटने का काम अब रालोद के नेता कर रहे हैं। वेस्ट यूपी के 15 जिलों की 60 सीटों पर जाट-मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में होता है। यूपी के इस इलाके में जाट मतदाता मुस्लिम मतदाताओं की तरह ही अपना प्रभुत्व रखते हैं।

2014 में अहम भूमिका रही

जाट समुदाय ने 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। लोकसभा चुनावों में जाटों ने एक तरफा बीजेपी के लिए वोट किया था, लेकिन अब जाटों का मोह भाजपा से भंग हो रहा है। ऐसा कहना है राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव डा. मैराजुद्दीन का। उनका कहना है कि बीजेपी ने जाटों से वोट तो ले लिए, लेकिन इस क्षेत्र के जाटों के लिए बीजेपी ने कुछ किया नहीं। लोकसभा चुनाव के चार साल बाद जाट मतदाता कुछ मुद्दों पर बीजेपी से खफा-सा हैं। वेस्ट यूपी की जाट लैंड केवल भाजपा के लिए ही नहीं बल्कि अन्य दलों के लिए भी निर्णायक साबित रहा है।

फिर जाट-मुस्लिम को जोड़ने की कोशिश

रालोद जाट-मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करता रहा है, लेकिन रालोद इस दोनों समुदाय के वोटों को एकजुट नहीं कर पाया। चुनाव के ऐन मौके पर वोटों का ध्रुवीकरण होने से बाजी रालोद के हाथ से निकल जाती है। डा. मैराजुद्दीन का कहना है कि इस बार रालोद वेस्ट यूपी के जाट-मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर ऐसी रणनीति तैयार कर रहा है कि दोनों समुदाय एक सियासी दल के साथ आएं। उनका कहना है कि इन दोनों कौमों के सामने अब मजबूत प्रतिनिधित्व का मसला भी एक बड़ी परेशानी हैं। राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत जाटों के परम्परागत नेता माने जाते हैं, लेकिन रालोद को लोकसभा-विधानसभा चुनाव में इसका लाभ नहीं मिला।

रालोद की फिलहाल यह स्थिति

2012 के विधानसभा चुनाव के बाद वेस्ट यूपी में रालोद के पास नौ विधायक थे, वहीं 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में रालोद का इस क्षेत्र से सूपड़ा ही साफ हो गया। यही कारण है कि अपना खोया जनाधार और राजनैतिक विरासत को बचाने के लिए ही रालोद जाट-मुस्लिम समुदाय को एक करने की पुरजोर कोशिश में है।

Published on:
24 Mar 2018 03:11 pm