यूपी की रहने वाली वंदना को रियो ओलंपिक का भी अनुभव है। वंदना ने जर्मनी में 2013 में जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम को दिलाया था कांस्य, चार मैचों में दागे से थे पांच गोल
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ (meerut news) यूपी की एक और खिलाड़ी का नाम टोक्यो ओलंपिक ( Tokyo Olympics ) जाने वालों की लिस्ट में शामिल हो गया है। इस खिलाड़ी का नाम वंदना ( Vandana ) कटारिया है। वंदना भारतीय महिला हॉकी टीम ( Indian women's hockey team ) में फारवर्ड खिलाड़ी की भूमिका में होंगी। यह पहला मौका है जब भारतीय महिला हॉकी टीम लगातार दूसरे ओलंपिक में चुनी गई है। इससे पहे रियो ओलंपिक के भी टीम क्वालीफाई हुई थी। मेरठ की वंदना को रियो ओलंपिक का भी अनुुभव है। वंदना का अनुभव टीम में शामिल युवा खिलाड़ियों में जोश भरेगा और भारतीय टीम मेडल लेकर लौटेगी। वंदना का कहना है कि टीम टोक्यो में इतिहास रचने के लिए तैयार है।
जर्मनी में 2013 में जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम को कांस्य पदक दिलाने में वंदना की अहम भूमिका थी। वंदना ने टूर्नामेंट के चार मैचों में पांच गोल दागकर अपनी प्रतिभा साबित की थी। वंदना का कहना है कि उस जीत के बाद जब उनके पिता मीडिया के सामने खड़े हुए तो उनकी आंखों से आंसू बंद ही नहीं हो रहे थे। पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। ऐसा इसलिए क्योंकि परिवार में एकमात्र पिता नाहर सिंह ही थे जो वंदना के हॉकी खेलने के पक्ष में थे। परिवार से छिपाकर लखनऊ हॉस्टल में प्रवेश दिलाने ले गए थे। करीब दो महीने पहले पिता के गुजर जाने से वंदना बेहद आहत हैं लेकिन उनमें पिता के सपने को पूरा करने का जज्बा अभी बाकी है। माता रोहण देवी सहित पूरा परिवार उन्हें इस सपने को पूरा करने को प्रेरित करता है।
मेरठ से शुरू हुआ खेल करियर
मूल रूप से उत्तराखंड के रोशनाबाद की रहने वाली वंदना कटारिया ने हाकी की शुरुआती प्रशिक्षण मेरठ के एनएएस कालेज स्थित हाकी मैदान पर कोच प्रदीप चिन्योटी के मार्गदर्शन में किया। प्रदीप ने वंदना को एक प्रतियोगिता के दौरान रोशनाबाद में देखा था और वहां के हाकी कोच स्वर्गीय केके ने वंदना और उनकी बहन को मेरठ में प्रशिक्षण के लिए भेजा था। वंदना ने मेरठ में साल 2004 से 2006 तक रहने के दौरान हाकी सीखी और जिले से लेकर प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। साल 2007 के शुरुआत में वंदना का चयन लखनऊ हास्टल में हुआ।
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वंदना ने भारत के लिए 218 मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 58 गोल दागे हैं। 2013 में जापान में हुई तीसरी एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थीं। 2014 में कोरिया में हुए 17वें एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली टीम में भी वंदना शामिल थीं। 2016 में सिंगापुर में चौथी एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम में भी वंदना की अहम भूमिका थी। वंदना 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेल में रजत जीतने वाली टीम में भी शामिल रहीं। इसके अलावा 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए 11वें राष्ट्रमंडल खेल में चौथे स्थान, 2016 में रियो ओलिंपिक, चीन में हुई दूसरी एशियन चैंपियनशिप में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहीं हैं।