मिर्जापुर

Divya mittal: यूपी के इस गांव में नहीं होती थी शादी, आधार कार्ड से मिलता था पानी, IAS दिव्या मित्तल ने बदली तस्वीर, जानिए पूरी कहानी

Divya Mittal: IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद यूपी के इस गांव की कहानी फिर चर्चा में है। पहाड़ी पर बसे इस गांव में पानी के लिए ग्रामीण टैंकर पर निर्भर थे। आधार कार्ड से पानी मिलता था। बेटियों की शादी तक लोग नहीं करते थे। दिव्या मित्तल के प्रयास से नौ महीने बाद हर घर तक पानी पहुंचा।
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IAS अधिकारी दिव्या मित्तल फोटो सोर्स X अकाउंट

IAS Divya mittal: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद उनके प्रशासनिक कार्यकाल की कई उपलब्धियां फिर चर्चा में हैं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने लहुरियादह गांव में पानी पहुंचाने के लिए ऐसा काम किया। जिसे कभी लगभग असंभव माना जाता था। पहाड़ी की चोटी पर बसे इस गांव में पानी के लिए ग्रामीणों को टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता था। नौ महीने की मेहनत के बाद जब घरों तक नल से पानी पहुंचा तो ग्रामीणों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

मिर्जापुर जिले का लहुरियादह गांव उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा के पास पहाड़ी की चोटी पर बसा है। गांव की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि यहां पाइपलाइन के जरिये पानी पहुंचाना आसान नहीं था। आजादी के 75 साल बाद भी ग्रामीणों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया था।
पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से जलापूर्ति की जाती थी। ग्रामीणों को पानी के लिए आधार कार्ड के आधार पर टैंकर से पानी मिलता था। हालात इतने मुश्किल थे कि लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराते थे।

पहली बार गांव पहुंचीं तो खुद पानी नहीं पी सकीं

बतौर जिलाधिकारी जब दिव्या मित्तल पहली बार लहुरियादह पहुंचीं। तो उन्होंने ग्रामीणों की परेशानी को करीब से देखा। उनके पास पानी की बोतल थी। लेकिन ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करते देख उन्होंने अपनी बोतल से पानी पीना भी उचित नहीं समझा। यही अनुभव उनके लिए इस समस्या को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ा मुद्दा बनाने वाला साबित हुआ। इसके बाद गांव तक पाइपलाइन पहुंचाने की कोशिश शुरू हुई।

नौ महीने तक चला लगातार काम

गांव तक पानी पहुंचाने के रास्ते में कई भौगोलिक और आर्थिक चुनौतियां थीं। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पाइपलाइन बिछाना और पानी की व्यवस्था करना आसान नहीं था। इसके बावजूद प्रशासन और संबंधित टीम ने लगातार काम किया। करीब नौ महीने की मेहनत के बाद आखिरकार वह दिन आया, जब ‘हर घर जल’ योजना के तहत लहुरियादह के घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की शुरुआत हुई।

IAS दिव्या मित्तल फोटो सोर्स X अकाउंट

नल खुला तो छलक पड़े खुशी के आंसू

जब पहली बार गांव में नल खोला गया और पानी की धार निकली तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिन परिवारों ने वर्षों तक पानी के लिए संघर्ष किया था। उनके घरों तक अब पाइपलाइन से पानी पहुंच रहा था। गांव में जश्न का माहौल था। कई लोगों की आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। दिव्या मित्तल ने भी इस पल को भावुक कर देने वाला बताया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनका हृदय भावनाओं से भरा हुआ है। लहुरियादह में पानी बहने के साथ लोगों की आंखों से भी खुशी के आंसू बह रहे हैं। उन्होंने कहा था कि नौ महीने की मेहनत के बाद टीम ने भौगोलिक चुनौतियों और व्यवस्थागत मुश्किलों को पार कर वह काम पूरा किया। जिसे लोग असंभव मानते थे।

दिव्या मित्तल की कार्यशैली बनी पहचान

दिव्या मित्तल गोंडा की मुख्य विकास अधिकारी और मिर्जापुर व देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। अपने कार्यकाल में वह जनता से सीधे जुड़ने और जमीन पर जाकर समस्याओं को समझने की कार्यशैली के लिए चर्चित रही हैं। अब उनके आईएएस पद से इस्तीफे के बाद उनके आगे के कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सोशल मीडिया पर राजनीति में आने और जनता के बीच काम करने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि, लहुरियादह की कहानी उनके प्रशासनिक कार्यकाल की उन उपलब्धियों में शामिल है, जहां एक बुनियादी जरूरत पूरी होने से सैकड़ों परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आया।

Updated on:
31 Aug 2026 10:07 am
Published on:
31 Aug 2026 10:07 am