महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सिफारिश के बावजूद, इस तरह का निर्णय चौंकाने वाला है।
नई दिल्ली। मराठा आरक्षण रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय अप्रत्याशित, समझ से बाहर और निराशाजनक है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सिफारिश के बावजूद इस तरह का निर्णय चौंकाने वाला है। अजीत पवार ने कहा कि देश के अन्य राज्यों में, भले ही आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर है। मगर यह समझ से परे है कि इसे मराठा आरक्षण के बारे में नहीं माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में महाराष्ट्र के उस कानून को असंवैधानिक बताया था, जिसके तहत मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई असाधारण परिस्थितियां नहीं हैं, जिनके आधार पर मराठा समुदाय को शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से कमजोर मानकर आरक्षण प्रदान दिया जाए।
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इस तरह का निर्णय चौंकाने वाला है: अजीत पवार
अजीत पवार ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सिफारिश के बावजूद, इस तरह का निर्णय चौंकाने वाला है। उन्हें यकीन था कि मराठा भाइयों का लंबा, संयमित, ऐतिहासिक संघर्ष सफल होगा और सुप्रीम कोर्ट उनके हक में फैसला सुनाए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर राज्य सरकार अपनी अगली भूमिका तय करेगी। राज्य सरकार मराठा समुदाय को हर संभव मुआवजा देने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि कोरोना संकट के दौरान समुदाय के सदस्यों के जीवन को खतरे में न डालें, बल्कि कोरोना से सभी के जीवन की रक्षा करें। राज्य सरकार मराठा समुदाय के लिए उचित अधिकार सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी।