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विजय माल्या केस में बड़ी सफलता, ब्रिटेन की अदालत ने माने सीबीआई के सबूत

कर्ज अदायगी में चूक और मनी लांड्रिंग मामले में भगोड़े विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए चल रहे केस में सीबीआई ने शुक्रवार को अदालत में कई सुबूत पेश किए
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Updated: 28 Apr 2018, 7:50 AM IST
vijay mallya

लंदन। भारतीय बैंकों के अरबों रुपए डकार कर ब्रिटेन भाग आए शराब कारोबारी विजय माल्या के मामले में सीबीआई को पहली बार लंदन की एक अदालत में बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। कर्ज अदायगी में चूक और मनी लांड्रिंग मामले में भगोड़े विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए चल रहे केस में सीबीआई ने शुक्रवार को अदालत में कई सुबूत पेश किए। वेस्टमिनिस्टर अदालत ने इन सुबूतों को स्वीकार कर लिया है।

मजबूत हुआ भारत सरकार का पक्ष

इन सबूतों को स्वीकार किये जाने के बाद भारत सरकार का पक्ष मजबूत हुआ है। बता दें कि माल्या पिछले साल अप्रैल में स्कॉटलैंड यार्ड की ओर से प्रत्यर्पण वॉरंट पर अपनी गिरफ्तारी के बाद से जमानत पर हैं। शुक्रवार को अदालत ने उनकी जमानत अवधि 11 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी। इस मामले में अगले सुनवाई भी उसी दिन होगी। अगली सुनवाई में वेस्टमिंस्टर अदालत की न्यायाधीश एम्मा अर्बथनॉट के समक्ष भारतीय पक्ष के द्वारा मौखिक दलीलें दी जाएंगी। इसके बाद न्यायाधीश अगली सुनवाई में मामले पर फैसले की अपनी योजना के संकेत दे सकती हैं।

लंदन की वेस्टमिनिस्टर कोर्ट में सीबीआई द्वारा पेश किये गए सबूतों में आइडीबीआइ बैंक के पूर्व उप प्रबंध निदेशक बीके बतरा और माल्या के बीच सांठ-गांठ से संबंधित दस्तावेज भी शामिल हैं। बता दें कि इससे पहली की सुनवाइयों में कोर्ट यह सबूत मानने से इन्कार कर रही थी। केस की अगली तारीख को फैसले में देरी का हथकंडा बनाने के सवाल पर माल्या ने कहा, 'हम अपनी आखिरी मौखिक दलील देना चाहते हैं। इसमें कुछ गलत नहीं है और न ही यह फैसले में देरी की कोई चाल है।'

कोई ठोस दलील नहीं है माल्या के पास

माल्या को बचाने के लिए उसके वकील भारत के आतंरिक मामलों को वजह बता रहे हैं। माल्या की टीम ने भारतीय जेलों में बंद कैदियों की दुगति पर उन्हीं जेल विशेषज्ञों से गवाही दिलवाई जिन्होंने न्यायाधीश अर्बर्थनॉट को मुकदमे की सुनवाई के दौरान कहा कि सभी भारतीय जेलों की दशा असंतोषजनक है। बता दें कि माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर जाने के बाद ब्रिटेन में रह रहे हैं। माल्या की बचाव टीम ने दावा किया था कि उनकी कोई गलत मंशा नहीं है और भारत में उन पर निष्पक्ष तरीके से मुकदमा चलाने की संभावना नहीं है। उनके वकीलों का अदालत में कहना है कि भारत वापस ले जाए जाने पर माल्या को आर्थर रोड सेंट्रल जेल में रखा जाएगा जहां न तो उचित रोशनी का प्रबंध है न ही जरूरी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा माल्या के वकीलों ने यह भी दलील दी कि भारत में उन पर निष्पक्ष रूप से मुकदमा चलाया जाना संभव नहीं है।

क्या करेंगी ब्रिटिश जज

यदि न्यायाधीश भारत सरकार के पक्ष में फैसला देती हैं तो ब्रिटेन के विदेश मंत्री के पास माल्या के प्रत्यर्पण आदेश पर दस्तखत के लिए दो महीने का वक्त होगा। इसके अलावा माल्या के पास वेस्टमिनिस्टर की अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायलय और अन्य अदालतों में अपील करने का भी अधिकार होगा। देखना है कि मामले की अगली सुनवाई के दिन भारतीय पक्ष की दलीलें किस हद तक काम करती हैं।

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