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हाईटेक हुआ चुनाव आयोग, बगैर पहचान बताए एप पर कर सकेंगे गड़बड़ियों की शिकायत

चुनाव आयोग ऐसा एप लॉन्च करने जा रहा है जिससे चुनाव के वक्त आम आदमी एप के जरिए सीधे आयोग से शिकायत कर सकेगा।

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Jun 02, 2018
हाईटेक हुआ चुनाव आयोग, बगैर पहचान बताए एप पर कर सकेंगे गड़बड़ियों की शिकायत

नई दिल्ली। चुनाव के दौरान धांधली, ईवीएम की खराबी या किसी भी शिकायत के लिए अब सिर्फ एक मोबाइल एप से किया जा सकेगा। भारतीय निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि अगले चुनावों में हर जगह के लोगों से शिकायत मंगाने के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग ने यह बात कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सबूत के साथ शिकायत करने में लोगों को सक्षम बनाने में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की सफलता को देखते हुए कही है।

कर्नाटक में हुआ एप्लीकेशन का ट्रायल

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मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने यहां कहा कि एप्लीकेशन से लोगों को सबूत के साथ शिकायत करने में मदद मिलेगी। हमने कर्नाटक चुनाव में एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया। हम आम लोगों को दुराचार पर लगाम लगाने की शक्ति प्रदान कर रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया में लोग पुलिस बन जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग सफल रहा और अब इसका उपयोग हर जगह किया जाएगा।

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शिकायत करने वालो की पहचान होगी गुप्त

रावत के अनुसार, एप्लीकेशन में क्षेत्र व संबंधित चुनाव क्षेत्र के अक्षांश और देशांतर का फीचर है। इससे संबद्ध चुनाव अधिकारियों की पहचान भी हो सकती है, ताकि शिकायतों का समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि शिकायतकर्ता की पहचान का खुलासा न हो।

कानून का पालन करेगा चुनाव आयोग

लोकसभा चुनाव पहले कराए जाने से संबंधित खबरों के बीच आयोग ने कहा कि वह कानून के प्रति निष्ठा रखता है और किसी भी सदन का कार्यकाल समाप्त होने के छह महीने से पहले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी नहीं कर सकता। ओ.पी. रावत ने कहा कि आयोग के पास चुनाव निर्धारित करने का फैसला लेने का अधिकार है।

समय से पहले लोकसभा चुनाव पर बोले रावत

आयोग को 2019 का आम चुनाव समय पूर्व कराने से संबंधित सुझाव प्राप्त होने के सवाल पर उन्होंने कहा, "बिल्कुल भी नहीं। निर्वाचन आयोग कानून के मुताबिक कार्य करेगा। मैंने कानून के बारे में बता दिया है..अगर कानून को जरूरत होगी कि चुनाव छह माह के भीतर कराने हैं तो आपको कराने होंगे।

1000 निष्क्रिय दल सूची से बाहर

भारत निर्वाचन आयोग ने पिछले दो सालों में 1,000 से ज्यादा राजनीतिक दलों को सूची से बाहर कर दिया है, जो लंबे समय से निष्क्रिय पड़े थे और चुनाव प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी. रावत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द नहीं कर सकता। हालांकि चुनाव आयोग ने उन राजनीतिक दलों को सूची से बाहर निकालना शुरू कर दिया, जो पूरी तरह से निष्क्रिय हैं या चुनावी प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे हैं।

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Published on:
02 Jun 2018 09:40 pm
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