Election Commissioner Ashok Lavasa बने Asian Development Bank के Vice President Chief Election Commissioner बनने की रेस में थे सबसे आगे पिछले Lok Sabha Election में पीएम मोदी और शाह के आचार संहिता उल्लंघन पर क्लीन चिट दिए जाने का किया था विरोध
नई दिल्ली। चुनाव आयुक्त ( Election Commissioner ) अशोक लवासा ( Ashok lavasa ) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयुक्त एशियाई विकास बैंक ( Asian Development Bank ) में उपाध्यक्ष ( Vice President ) का पदभार संभालने जा रहे हैं। खास बात यह है कि बतौर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के कार्यकाल में अभी दो साल से भी ज्यादा का वक्त बचा है। यही नहीं अशोक लवासा मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की रेस में भी सबसे आगे थे। हालांकि उन्होंने इससे पहले ही एडीबी के उपाध्यक्ष पद का ऑफर स्वीकर कर लिया।
पत्नी नोवल सिंह लवासा के आयकर के रडार पर आने और कथित टैक्स चोरी के चल रहे मामले के कारण संभवतः अशोक लवासा ने एडीबी का ऑफर स्वीकार किया है।
दिवाकर गुप्ता की लेंगे जगह
अशोक लवासा एडीबी उपाध्यक्ष दिवाकर गुप्ता की जगह लेंगे, जो अभी निजी क्षेत्र के संचालन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के प्रभारी हैं। दिवाकर गुप्ता का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है।
लोकसभा चुनाव के दौरान चर्चा में थे लवासा
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान अशोक लवासा काफी चर्चा में थे। दरअसल लवासा ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दिए जाने पर सवाल खड़े करने के साथ ही विरोध किया था।
विरोध करने वाले चुनाव आयुक्तों में लवासा एकलौते आयुक्त थे। इसके बाद लवासा के परिवार वालों को इनकम टैक्स का नोटिस मिला था।
6 मामले में दी थी पीएम मोदी को क्लीन चिट
चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के छह मामलों में पीएम मोदी को क्लीन चिट दी थी। लवासा चाहते थे कि उनकी अल्पमत की राय को रिकॉर्ड किया जाए।
मुख्य चुनाव बनने की लाइन में सबसे आगे थे
1980 बैच के IAS ऑफिसर अशोक लवासा पोल पैनल में चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के साथ हैं। पूर्व वित्त सचिव लवासा अगले मुख्य चुनाव आयुक्त बनने की लाइन में सबसे आगे थे। 2021 में सुनील अरोड़ा के रिटायरमेंट के बाद उन्हीं की बारी थी।
आय से अधिक संपत्ति मामले में राडार पर लवासा की पत्नी
चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की पत्नी नोवल सिंह लवासा सहित परिवार के तीन सदस्य आय से अधिक कम संपत्ति की कथित घोषणा के लिए पिछले दिनों आयकर विभाग के संदेह के घेरे में आए थे।