
नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ( Home Ministry ) ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वो सुनिश्चित करें कि कोई भी मजदूर पैदल अपने घर के लिए यात्रा न करें।
गृह मंत्रालय ने कहा है कि जिस जगह से मज़दूर ( Migrant labor ) पलायन कर रहे हैं वहाँ पर ही राज्य ज़िम्मेदारी पूर्वक मज़दूरों के लिए चलायी जा रही ट्रेनों के बारे में उन्हें जानकारी दे।
मंत्रालय ने जो एडवाइजरी राज्यों के लिए जारी की है उसमें ये भी कहा गया है कि जो मज़दूर अपने घरों के लिए पैदल निकल पड़े हैं वो जिस भी इलाक़े से गुज़र रहे हैं वहाँ स्थानीय प्रशासन उनकी मदद करें।
जिस भी ज़िले की सीमा में ये मज़दूर हैं वहाँ के कलेक्टरों और पुलिस अधिकारी उनके लिए भोजन, पानी की व्यवस्था करें।
यही नहीं मज़दूरों और उनके परिवारों के लिए रात्रि विश्राम या ठहरने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि सभी प्रदेश अपने जिला कलेक्टरों को एलर्ट करें और उनकी ज़िम्मेदारी तय करें।
अफसर, पलायन कर रहे मज़दूरों और उनके परिवार के लिए चिकित्सा सुविधा रहने और खाने की व्यवस्था करें।
सभी राज्यों के ज़िला के ज़िलाधिकारी मज़दूरों को यात्रा के साधनों के बारे में भी जागरूक करने के लिए हाईवे पैट्रोल, पुलिस PCR का इस्तेमाल करें।
टोल नाकों पर अफ़सरों की नियुक्ति करें इस मामले में हाई कोर्ट मैं भी उत्तर प्रदेश बिहार और दूसरे राज्यों को कहा है कि 400 मज़दूरों पर दो अफ़सरों की नियुक्ति हो जिससे मज़दूरों की देखभाल की जा सके।
इन अधिकारियों की ड्यूटी हो कि वो भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही बसों से संपर्क करके इन मज़दूरों को गंतव्य तक पहुंचाएं।