
नई दिल्ली। आतंकियों ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के पुलिस कॉन्सटेबल जावेद अहमद डार की हत्या कर सेना के सामने चुनौती पेश कर दी है। जानकारी के मुताबिक आतंकी डार की गतिविधियों पर पिछले कुछ दिनों से नजर रखे हुए थे। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि अगवा करने से पहले आतंकियों ने डार के घर की भी रेकी की थी। इस दौरान आतंकियों ने इस बात का अंदाजा लगा लिया था कि पुलिस कॉन्सटेबल किस समय कहां जाते है और कब वापस आते हैं। इस जानकारी का लाभ उठाते हुए आतंकियों ने जावेद को कल अगवा कर लिया और उनकी हत्या कर दी। जिस समय उनकी हत्या हुई उस समय डार के पास कोई हथियार नहीं था। आज उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस मौके पर उनके जनाजे में हजारों की संख्या लोग शामिल हुए।
जावेद को संभलने का नहीं मिला मौका
जावेद एसएसपी शालिंदर मिश्रा का निजी सुरक्षा गार्ड था। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार कार में सवार आतंकी कई बार उसके घर के आसपास घूमते देखे गए थे। इसी दौरान जब जावेद घर से दवा लेने के लिए निकला तो आतंकियों ने उसे अगवा कर लिया। यही कारण है कि जावेद को अगवा करने में आतंकियों को ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ी। आतंकियों ने उन्हें ट्रैप करते ही पुरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया जिसके वजह से जावेद को संभलने का मौका नहीं मिला।
शोपियां में मिला शव
कचडूरा गांव से अगवा किए गए पुलिस कॉन्सटेबल डार का शव डांगर शोपियां में मिला है। आतंकियों ने जावेद के सिर पर गोली मारकर उनकी हत्या की। आतंकियों ने उन्हें उस समय अगवा कर लिया जब वो मां के लिए मेडिकल स्टोर से दवा लेकर लौट रहे थे। गुरुवार रात से ही उनकी तलाश की जारी थी। इस घटना के पीछे हिजबुल का हाथ बताया जा रहा है।
औरंगजेब को भी इसी क्षेत्र से किया था अगवा
आपको बता दें कि करीब एक महीने पहले सेना के जवान राइफलमैन औरंगजेब की आतंकियों ने शोपियां क्षेत्र से ही अगवा करने के बाद हत्या कर दी थी। औरंगजेब 44 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात थे और ईद की छुट्टियां मनाने के लिए ड्यूटी से घर लौट रहे थे। लौटते वक्त उन्हें आतंकियों ने अगवा कर लिया था। एक दिन बाद गोलियों से छलनी उनका शव मिला था।