Jagannath yatra के बाद Jagannath temple head priest का बड़ा बयान Dilip Das ने कहा मेरे साथ खेला गया खेल, जिस भरोसा किया उसने धोखा दिया प्रमुख पुजारी ने Ahemedabad में Jagannath Yatra नहीं निकालने जाने पर कही बड़ी बात
नई दिल्ली। कोरोना संकट ( Coronavirus ) के बीच गुजरात के अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा ( jagannath Rath Yatra ahmedabad ) 142 वर्ष बाद शहर में नहीं निकाली जा सकी। रथ को मंदिर परिसर में ही घुमाया गया और इसके बाद भगवान के विग्रहों को रथ से उतारकर दोबारा मंदिर में स्थापित भी कर दिया गया। लेकिन रथ यात्रा के दूसरे ही दिन जगन्नाथ मंदिर के महंत और प्रमुख पुजारी ( Jagannath temple head priest ) दिलीप दास ( Dilip Das ) ने बड़ा बयान दिया है।
मंदिर के मुख्य पुजारी ने कहा कि उनके खिलाफ एक "खेल खेला गया है"। वहीं दक्षिणपंथी संगठनों ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार की ओर से कोई कदम ना उठाए जाने को लेकर कड़ी आलोचन की है।
मंदिर के प्रमुख पुजारी दिलीप दास ने कहा कि रथयात्रा न निकलने पर आमजन से माफी मांगता हूं। उन्होंने सरकारी अमले पर भी गुस्सा जताया। दास बोले कि, मेरे गलत व्यक्ति पर भरोसा करने से 142 साल पुरानी परंपरा टूट गई।
मुझे किसी ने भरोसा दिया था कि रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी जाएगी, लेकिन मैंने जिस पर भरोसा किया, उसने मुझे धोखा दिया। यही वजह है कि मैं भगवान जगन्नाथ को नगरयात्रा नहीं करवा सका।
दिलीप दास ने हालांकि इस दौरान किसी का नाम नहीं लिया। कि आखिर उनके साथ साजिश किसने रची। उन्होंने कहा कि - मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन मेरा काम तब होता, जब मैं किसी और के बजाय भगवान पर भरोसा करता। यदि सब सही रहता तो हर बार की तरह रथयात्रा शहर भर से निकलती।'
आपको बता दें कि मंगलवार को एक समारोह आयोजित किया गया था और जमालपुर में मंदिर से अहमदाबाद के सरसपुर तक हर साल आयोजित होने वाली 18 किलोमीटर की यात्रा के बजाय मंदिर परिसर के अंदर फेरे लेने के लिए रथ बनाए गए थे।
दास ने कहा कि मैं हालातों के मोड़ पर नाखुश था। उन्होंने कहा- मेरी टिप्पणी राज्य सरकार और उच्च न्यायालय के बीच झगड़े से संबंधित थी।
आपको बता दें कि विश्व हिंदू परिषद गुजरात समूह ने भी मंगलवार रात एक बयान जारी कर दावा किया कि "गुजरात की मौजूदा भाजपा सरकार को हिंदू कभी माफ नहीं करेंगे"।
चकनाचूर हुआ आत्मविश्वास
मंदिर के ट्रस्टी महेंद्र झा ने कहा कि, हमारा आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया। रथयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सरकार, ईश्वर और न्यायालय पर भी भरोसा था। लेकिन हम गलत थे, हमें अंत में सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए भी समय नहीं मिला।