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कठुआ रेप केस: पीड़िता की पहचान जाहिर होने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा मरने वालों की भी गरिमा होती है

शीर्ष अदालत दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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नई दिल्ली। कठुआ गैंग रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए गैंग रेप का शिकार आठ साल की बच्ची सहित देश के अन्य हिस्सों में बलात्कार पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करने के मसले पर सुनवाई करते हुए पीड़ित लड़कियों की पहचान जाहिर होने पर नाराजगी व्यक्त की है। शीर्ष अदालत दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

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अपने फैसे में सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि मृतक की भी गरिमा होती है और उनका नाम लेकर उनकी गरिमा को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सभी को बेहद संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। यहां तक कि भी जहां बलात्कार पीड़ित जीवित हैं अथवा नाबालिग या मानसिक रोगी हों तो भी उसकी पहचान जाहिर नहीं करनी चाहिए।

जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 228- ए के अंतर्गत मृतक की गरिमा के बारे में भी सोचना चाहिए। अदालत ने कहा कि मरने वाले की गरिमा होती है और इसका ख्याल रखा जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने मीडिया को भी इस मामले में आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस तरह पीड़ित नाम लिये बगैर भी न्यूज की रिपोटिंग की जा सकती है। बता दें कि 228- ए यौन हिंसा के पीड़ितों की पहचान उजागर करने से संबंधित है। हालांकि पीठ इस धारा से संबंधित पहलुओं पर विचार के लिये तैयार हो गयी लेकिन उसकी सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि बलात्कार का शिकार किसी नाबालिग की पहचान उसके माता पिता की सहमति से कैसे उजागर की जा सकती है। पीठ ने कहा कि निजता के अधिकार का दायरा बहुत बड़ा है। माता पिता की सहमति या असहमति से इतर भी किसी व्यक्ति विशेष की कोई अपने गरिमा होती है जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 8 मई निर्धारित की है। केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए उसे कुछ समय चाहिए। इसके बाद केन्द्र के वकील ने आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिये न्यायालय से समय का अनुरोध किया। बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह ही 12 मीडिया घरानों को कठुआ बलात्कार पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करने की वजह से दस दस लाख रूपए बतौर मुआवजा अदा करने का निर्देश दिया था। इन मीडिया घरानों ने पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करने पर हाईकोर्ट से क्षमा भी मांगी थी।

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Published on:
25 Apr 2018 12:13 pm
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