Delhi Government ने हाईकोर्ट में कोरोना शुल्क के खिलाफ दायर याचिका का विरोध किया। शराब का व्यापार और उसका उपभोग व्यक्ति का Fundamental Right नहीं। विशेष सुविधा देने के लिए 70 फीसदी अतिरिक्त शुल्क ले रही है केजरीवाल सरकार।
नई दिल्ली। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court ) में शराब पर 70 प्रतिशत कोरोना टैक्स ( Corona Tax ) लगाने के खिलाफ दायर याचिका का केजरीवाल सरकार ( Kejriwal Government ) ने विरोध किया। हाईकोर्ट के समक्ष दायर अपने हलफनामे में केजरीवाल सरकार ने कहा कि शराब का व्यापार और उसका उपभोग व्यक्ति का मौलिक अधिकार ( Fundamental Right ) नहीं है। सरकार के पास इसकी बिक्री को नियंत्रित करने का अधिकार है।
दिल्ली सरकार ( Delhi Government ) की ओर से अदालत में पेश वकील ने कहा कि शराब के सभी ब्रांडों की एमआरपी पर 70 फीसदी का विशेष कोरोना शुल्क जनता को एक विशेष सुविधा मुहैया कराने के लिए ले रही है।
दिल्ली सरकार ने कोरोना शुल्क के खिलाफ दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि शराब बिक्री के लिहाज से विशेषाधिकार का तत्व है। सरकार आबकारी कानून ( Excise Rule ) के तहत इसे नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र है। दिल्ली सरकार की ओर से आबकारी विभाग ने याचिकाओं के जवाब में कहा कि राज्य को ऐसे विशेषाधिकार देने के लिए शुल्क लगाने का भी अधिकार है। कोराना शुल्क लोगों को विशेष सुविधा मुहैया कराने के लिए लिया जा रहा है।
राज्य के पास शराब की बिक्री, खरीद और उपभोग को नियंत्रित करने का भी अधिकार है। दिल्ली के अलावा 10 अन्य राज्यों असम, मेघालय, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ने भी ऐसे ही शुल्क लगाए गए हैं।
बता दें कि वकील ललित वलेचा और प्रवीण गुलाटी ने विशेष कोरोना शुल्क लगाने को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाएं ( Writ ) दायर की हैं।