देश में Coronavirus का प्रभाव इस बार Ganesh Chaturthi पर भी इस बार Lolbagh में नहीं मनाया जा रहा गणेश उत्सव ( Ganesh Chaturthi )
नई दिल्ली। देश में फैले कोरोना संक्रमण ( Coronavirus in india ) का प्रभाव इस बार गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi ) पर भी देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है मुंबई का लालबाग ( Lalbagh in mumbai )। लालबाग को भला कौन नहीं जानता, यहां के गणपति दर्शन और गणेश चतुर्थी ( Ganesh Chaturthi 2020 ) पर गणेश पंडाल देश भर में मशहूर है। गणेश चतुर्थी के दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु गणपति के दर्शन को पहुंचते है। लेकिन इस बार कोरोना महामारी ( Coronavirus Crisis ) ने गणेश जन्मोत्सव ( Ganesh Birthday ) को फीका कर दिया है। कोरोना वायरस के प्रकोप ( Coronavirus Outbreak ) की वजह से यहां गणेश उत्सव नहीं मनाया जा रहा है। बल्कि उसकी जगह पर इस साल यहां रक्तदान शिविर ( Blood donation camp ) और प्लाज्मा डोनेशन कैंप ( Plasma donation camp ) लगाए गए हैं।
इस बार यहां केवल चार फीट की प्रतिमा स्थापित की गई
दरअसल, मुंबई में लालबागचा राजा नाम से प्रसिद्ध गणेश पंडाल का आयोजन सावर्जनिक गणेशोत्सव मंडल करना है। इस बार कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए मंडल ने गणेश उत्सव को रद्द कर दिया और उसकी जगह 'आरोग्य उत्सव' मानने का निर्णय लिया। कोरोना संकट के बीच सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों के अनुपालन में इस बार यहां केवल चार फीट की प्रतिमा स्थापित की गई, जबकि हर बार यहां पर गजानन की विशाल और भव्य प्रतिमा लगाई जाती रही है।
इस बार गणेश उत्सव कार्यक्रम में बड़ा बदलाव
यही नहीं लोग भी इस बार कोरोना महामारी को लेकर जागरुक दिखाई दिए। उन्होंने गणेश चतुर्थी के अवसर पर न केवल ब्लड और प्लाज्मा डोनेशन में सहभागिता दिखाई, बल्कि इसके लिए अन्य लोगों को भी जागरुक किया। सावर्जनिक गणेशोत्सव मंडल के अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना महामारी और सरकारी गाइडलाइन की वजह से इस बार गणेश उत्सव कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने गणेशोत्सव को लेकर खास गाइडलाइन जारी की
आपको बता दें कि महाराष्ट्र देश के सबसे अधिक कोरोना प्रभावित राज्यों की सूची में पहले नंबर पर बना हुआ है। यही वजह है कि महाराष्ट्र सरकार ने गणेशोत्सव को लेकर खास गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा और विसर्जन से पहले कोई जुलूस नहीं निकाला जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक पंडालों और घरों में होने वाली पूजा में भी भगवान गणेश की प्रतिमा की उंचाई को सीमित की गई है।