पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पूरे देश में फैल रहे कोरोना वायरस और ऑक्सीजन की कमी के लिए भाजपा जिम्मेदार है।
कोलकाता। देश के कई राज्यों में लगातार कोरोना के बढ़ते मामलों ने चिंताएं बढ़ा दी है। वहीं संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच ऑक्सीजन की कमी से हाहाकार मचा है। कई राज्यों में विस्फोटक स्थिति बनी हुई है। लिहाजा, तमाम राज्यों की मांग के आधार पर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ऑक्सीजन की आपूर्ति करने के निर्देश दिए हैं।
इन सबके बीच ऑक्सीजन की कमी और आपूर्ति को लेकर जमकर राजनीति भी हो रही है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। जिसको लेकर सभी पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं। इसी कड़ी में राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भाजपा के शीर्ष नेताओं को जिम्मेदार ठहराया और अब ऑक्सीनज की कमी को लेकर भी तीखा हमला बोला है।
ममता बनर्जी के आरोपों पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को पता नहीं है कि बंगाल में ऑक्सीजन निर्माण करने वाली कितनी फैक्ट्रियां हैं। बंगाल में बहुत आयरन उद्योग इकाइयां हैं जो ऑक्सीजन पैदा करती है। अगर ममता बनर्जी उनसे बात कर ले तो बंगाल में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी। उन्हें सिर्फ राजनीति करनी है।
ममता ने मोदी सरकार पर लगाया
आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पूरे देश में फैल रहे कोरोना वायरस और ऑक्सीजन की कमी के लिए भाजपा जिम्मेदार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत है और उसकी आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के हिस्से की ऑक्सीजन वहां डायवर्ट कर दी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जीतने के लिए देश में कोरोना को फैलाया है।
ममता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा 'बीजेपी शासित राज्यों में ऑक्सीजन की आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखा जा रहा है। राज्य में केवल 20,000 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं। हमें ऑक्सीजन कहां से मिलेगी? केंद्र सरकार बंगाल की स्थिति को खराब करना चाहती है।'
उन्होंने आगे कहा 'केंद्र सरकार की लापरवाही के कारण कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहले ऑक्सीजन स्टॉक करने के निर्देश दिए थे, तब केंद्र सरकार ने ऐसा क्यों नहीं किया?'