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सियाचिन में जवानों से मिले राष्ट्रपति कोविंद, कहा-आप लोगों के लिए जनता के मन में अलग ही सम्मान

सियाचिन दौरे के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ऑपरेशन मेघदूत की भी चर्चा की और बलिदान देने वाले जवानों को नमन किया।
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के सियाचिन पहुंचे। यहां वो इंडियन आर्मी के एक बेस कैंप में जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया। उनके साथ सेना प्रमुख बिपिन रावत भी मौजूद रहे। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सेना के जवानों को कहा कि हर एक भारतीयों की प्रार्थना आप लोगों के लिए दुआएं होती हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि देश का हर एक नागरिक आप लोगों के परिवार के साथ खड़ा है। राष्ट्रपति कोविंद ने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि देश के सबसे ऊंचे सीमा की रक्षा करने वाले जवानों के लिए लोगों के मन में अलग ही सम्मान है।रामनाथ कोविंद दूसरे राष्ट्रपति हैं जो सियाचिन पहुंचे हैं। इससे पहले 2004 में दिवंगत राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने सियाचिन का दौरा किया था। राष्ट्रपति कोविंद ने आगे कहा कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे आप जैसे बहादुर जवानों से मिलने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध मैदान सियाचिन में सामान्य जीवन यापन करना काफी मुश्किल है। यहां हमेशा अपने दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार रहना और भी कठिन काम है। ऐसे में आप लोगों से मिलकर मैं बेहद खुशकिस्मत हूं।

राष्ट्रपति ने की ऑपरेशन मेघदूत की चर्चा

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि मैं उन जवानों को नमन करता हूं जो यहां शहीद हुए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ऑपरेशन मेघदूत की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अप्रैल 1984 में ऑपरेशन मेघदूत के तहत भारतीय सेना ने सियाचिन में प्रवेश किया था। तब से लेकर आज तक, आप जैसे वीर जवानों ने मातृ-भूमि के सबसे ऊंचे इस भू-भाग पर शत्रु के कदम नहीं पड़ने दिए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जवानों को राष्ट्रपति भवन आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि आप लोग जब भी दिल्ली आएं तो राष्ट्रपति भवन जरूर आएं।

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जवानों का राष्ट्रपति ने बढ़ाया था हौसला

बता दें कि इससे पहले पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति कोविंद ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा पर भारतीय जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए दौरा किया था। रामनाथ कोविंद के इस दौरे को लेकर चीन के होश फाख्ता हो गए थे और उसने इसको लेकर कड़ा ऐतराज जताया था। तब चीन ने कहा था कि भारत को ऐसे समय में सीमा विवाद को ‘जटिल बनाने’ से बचना चाहिए जब द्विपक्षीय रिश्ते ‘निर्णायक क्षण’ में हों।

Published on:
10 May 2018 06:20 pm