आंध्र प्रदेश में 'नागराज' का प्रकोप फैला हुआ है। दिविसीमा नामक इलाके में तकरीबन 100 लोगों को सांप ने डस लिया है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है।
हैदराबाद। आंध्र प्रदेश में 'नागराज' का प्रकोप फैला हुआ है। सांप के डसने और इससे हुई मौतों के चलते लोग खौफ के माहौल में जी रहे हैं। दिविसीमा नामक इलाके में तकरीबन 100 लोगों को सांप ने डस लिया है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। जबकि दो लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जब प्रदेश सरकार को लोगों को एंटी-वेनम इंजेक्शन मुहैया कराने चाहिए और लोगों को सांप के काटने से बचने और काटने के बाद क्या करें, इस बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए, सरकारी विभाग इनके बजाए सर्प शांति हवन-यज्ञ आयोजित करने में जुटी है।
मामला आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले का है। यहां स्थित दिविसीमा गांव में दो लोगों की मौत सांप के डसने से हो चुकी है। वहीं, 100 लोग सांप के डसने के चलते अस्पताल में भर्ती है। एकाएक सांप के डसने इन तमाम घटनाओं को देखने के बाद आंध्र प्रदेश सरकार का एक विभाग अलग ही रास्ते पर चल पड़ा। इस विभाग ने मोपिदेवी के श्री सुब्रह्मण्येश्वरा स्वामी मंदिर में आगामी 29 अगस्त को 'सर्प शांति यज्ञ' के आयोजन की घोषणा की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कृष्णा जिले के जिलाधिकारी बी लक्ष्मीकांतम ने कहा कि स्थानीय निवासियों के साथ ही एडॉवमेंट डिपार्टमेंट सर्प यज्ञ आयोजित करवा रहा है। इसके चलते लोगों का हौसला बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि अवनीगड्डा में सांप के काटने से एक व्यक्ति की मौत हुई है जबकि गन्नवरम में एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई। चौंकाने वाली बात है कि जुलाई तक ही करीब 100 लोगों को सांप ने काटा। इसके बाद सरकार ने कई कदम उठाए और अब इन घटनाओं में कमी आ रही है।
वहीं, सर्प यज्ञ को लेकर संबंधित विभाग के उपायुक्त और श्री सुब्रह्मण्येश्वरा स्वामी मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एम शारदा कहते हैं कि सरकार द्वारा प्रायोजित यज्ञ में कम से कम 15 पुजारी शामिल होंगे और इस पूजा को संपन्न करेंगे। यज्ञ के दौरान सर्प सूक्तम मंत्रों का जाप चलेगा। दूसरी तरफ जिला प्रशासन द्वारा हर एक गांव में दो-दो सपेरों को लगाया और इन सपेरों ने दो दिनों में छह सांप पकड़े।
हालांकि, फ्रेंड ऑफ स्नेक सोसाइटी के महासचिव अविनाश विश्वनाथन का मानना है कि जो सर्प शांति यज्ञ इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए किया जा रहा है, उसका कोई औचित्य नहीं है। जरूरी बातों को ध्यान में रखते हुए ही इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।