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आतंक छोड़ देश के लिए शहीद हो गया अहमद वानी, सेना ने दी सलामी

एक दौर में अहमद वानी खुंखार आतंकी थे लेकिन 2004 में वे सेना में शामिल हो गए। सोमवार को देश की रक्षा के नाम पर आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए।
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Nov 27, 2018
nazeer ahmed wani
आतंक छोड़ देश के लिए शहीद हो गया अहमद वानी, सेना ने दी सलामी

नई दिल्ली। सामान्‍यतौर पर लोग यह मानते हैं कि आतंक का अपना कोई ईमान नहीं होता, लेकिन शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी उनमें से नहीं हैं। वह वर्षों पूर्व खूंखार आतंकी थी, लेकिन बाद में उन्‍होंने खुद को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वह भारतीय सेना में शामिल हो गए। संयोग देखिए कि सोमवार को भारतीय सीमा और लोगों की सुरक्षा के लिए खुद को बलिदान कर दिया। आतंकियों साथ मुठभेड़ में उनहीं गोली लगी और वह हमारे बीच नहीं रहे। सेना के अधिकारियों ने कहा है कि वानी का बलिदान बेकार नहीं जाएगा।

तिरंगे में लपेटा गया वानी का शव
शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी सोमवार को आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए। सोमवार को उन्‍हें सेना ने सलामी के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम विदाई में भारी संख्‍या में स्‍थानीय नागरिक भी शामिल हुए। सुपूर्द-ए-खाक के मौके पर हर किसी की आंखे नम थी। उनके पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर तिरंगे में लपेटकर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में उनके पैतृक गांव अशमुजी लाया गया। अमर शहीद का शव पैतृक गांव पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सभी ने उन्‍हें नम आंखों से विदाई दी और उनके सम्‍मान में नारे लगाए।

देश के लिए दे दी कुर्बानी
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि वानी सेना में शामिल होने से पहले खूंखार आतंकी थे। उन्होंने बाद में हिंसा के रास्ते को छोड़कर देश सेवा के लिए सेना में शामिल हो गए। सेना के अधिकारी ने कहा कि लांस नायक वानी के देश और अपने राज्य की शांति के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। बता दें कि वानी 25 नवंबर को शोपियां में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। शोपियां मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने सात आतंकियों को मार गिराया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी शामिल थे।

शहादत को याद रखेगा हिन्‍दुस्‍तान
आपको बता दें कि नाजिर अहमद वानी 2004 में सेना में शामिल हुए थे और सेना में रहते हुए दो बार अगस्त 2017 और 2018 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया। वानी के घर में पत्नी और दो बच्चे हैं। उन्हें कल सुपुर्द ए खाक करते समय 21 तोपों की सलामी दी गई। इस मौके पर करीब 500 से 600 लोक मौजूद थे। उनका गांव आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है। लेकिन जैसे की वानी की मौत की खबर लगी गांव में मातम छा गया। उनकी शहादत को वतन हमेशा याद रखेगा।

Published on:
27 Nov 2018 11:51 am