HIGHLIGHTS Nagorno Karabakh Conflict: आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच विवादित क्षेत्र नागोर्नो कारबाख को लेकर सोमवार को भी जंग जारी रहा। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर टैंकों, तोपों, फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्‍टर से हमले का आरोप लगाया है।
येरेवान। काकेकस इलाके के दो पड़ोसी एशियाई देश आर्मेनिया और अजरबैजान ( Armenia Azerbaijan Conflict ) के बीच विवादित क्षेत्र नागोर्नो कारबाख ( Nagorno Karabakh ) को लेकर रविवार को शुरू हुआ युद्ध सोमवार को भी जारी है। दोनों ही देशों की ओर से तोप और टैंकों के जरिए एक-दूसरे पर हमला किया जा रहा है। इस जंग में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैंकड़ों लोग घायल हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर टैंकों, तोपों, फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर से हमले करने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दोनों ही देशों में जैसे-जैसे जंग तेज होती जा रही है वैसे-वैसे रूस और तुर्की के इस युद्ध में कूदने का खतरा मंडराने लगा है। यदि ऐसा होता है, तो तीसरे विश्व युद्ध के छिड़ने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
दोनों ही देशों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं। अजरबैजान रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि आर्मेनिया सुरक्षाबलों ने सोमवार सुबह टारटार शहर पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी, जबकि आर्मेनिया ने कहा है कि अजरबैजान के सुरक्षाबलों ने सुबह होते ही भीषण हमला शुरू कर दिया। यह जंग रातभर तक जारी रही।
आर्मेनिया के 550 से अधिक सैनिकों की मौत का दावा
सोमवार को अजरबैजान रक्षा मंत्रालय ने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी को बताया कि अभी तक की जंग में आर्मेनिया के 550 से अधिक सैनिक मारे गए हैं। हालांकि आर्मेनिया ने अजरबैजान के इस दावे को खारिज कर दिया है और दावा किया है कि अजरबैजान के चार हेलिकॉप्टरों को मार गिराया गया है।
दोनों देशों में छिड़े इस जंग के मद्दनेजर आर्मेनिया ने जहां देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया है और सेना को सीमा की ओर कूच करने का आदेश दिया है तो वहीं बढ़ते संकट को देखते हुए अजरबैजान ने भी कुछ क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगाया है। इसके अलावा कुछ शहरों में कर्फ्यू के आदेस दिए हैं।
रूस-तुर्की में मंडराया युद्ध का खतरा
बता दें कि आर्मेनिया और अजरबैजान में जारी जंग के बीच रूस-तुर्की में भी युद्घ की संभावना बढ़ती जा रही है। सीरिया में एक-दूसरे के सामने खड़े दोनों देश इस युद्ध में कूद सकते हैं। चूंकि रूस आर्मेनिया का समर्थन कर रहा है, तो वहीं नाटो देश तुर्की और इजरायल अजरबैजान के साथ खड़ा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस और आर्मेनिया के बीच एक समझौता हुआ है। इस संधि के मुताबिक, यदि अजरबैजान के साथ कभी जंग होती है और ये युद्ध आर्मेनिया की जमीन पर होती है तो ऐसे में रूस को मोर्चा संभालने के लिए आगे आना पड़ सकता है। अब आर्मेनिया ने कहा है कि उनकी सरजमीं पर ये हमला किया गया है।
दूसरी ओर तुर्की भी अजरबैजान के पक्ष में खड़ा हो गया है। तुर्की ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि हम समझते हैं कि इस संकट का शांतिपूर्वक समाधान होना चाहिए, पर आर्मेनिया अभी तक इसके लिए इच्छुक नजर नहीं आ रहा है। तुर्की ने बिना नाम लिए रूस की ओर इशारा करते हुए कहा कि आर्मेनिया या किसी अन्य देश के आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ हम अजरबैजान के आम नागरिकों के साथ सबसे आगे खड़े रहेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि नागोरनो-काराबाख में तुर्की में बने हथियार और ड्रोन विमान आर्मेनिया के टैंकों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में रूस इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा और सख्त कदम उठा सकता है। यदि तुर्की और रूस इस युद्ध में कूदते हैं तो फिर बाकी देश भी अपने-अपने सहयोगियों के साथ युद्ध क्षेत्र में उतर सकते हैं और तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
इसलिए छिड़ी है जंग
गौरतलब है कि सोवियत रूस से अगल हुए आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-कारबाख क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद है। 1994 की लड़ाई के बाद से नागोर्नो-कारबाख क्षेत्र अजरबैजान के नियंत्रण में नहीं है। लेकिन अजरबैजान इसे अपना क्षेत्र मानता है और अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसे अजरबैजान का ही हिस्सा माना जाता है।
उससे पहले 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित करते हुए आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया था। करीब 4,400 किलोमीटर में फैला नागोर्नो-कारबाख का ज्यादातर हिस्सा पहाड़ी है। बीते जुलाई में दोनों देशों में झड़प हुई थी, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी।