
नई दिल्ली। अमरीका और चीन के बीच जारी ट्रेड-वार का असर सैन्य संबंधों पर भी दिखने लगा है। चीन की विस्तारवादी नीतियों से अमरीका इस कदर नाराज है कि उसने दुनिया के सबसे बड़े समु्द्री सैन्य अभ्यास रिमपैक में शामिल होने के लिए अमरीका चीन को आमंत्रित नहीं किया है। जबकि इस युद्धाभ्यास में शामिल होने के लिए उसने भारत सहित कुल 26 देशों को आमंत्रित किया है। जानकारी के मुताबिक अमरीका के इस युद्धाभ्यास में दुनिया के सभी देश रुचि दिखाते हैं। इसके पीछे वजह यह है कि इस युद्धाभ्यास में अत्याधुनिक नौसैनिक हथियारों का प्रदर्शन होता है। अमरीका के इस रुख साफ हो गया है कि अमरीका केवल ट्रेड के मामले में ही नहीं बल्कि सैन्य हितों को लेकर भी चीन से सतर्क है।
चीन ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
दो साल में एक बार आयोजित होने वाले रिमपैक अभ्यास में इस साल 47 पोत, पांच पनडुब्बियां, 18 राष्ट्रीय थल सेना, 200 से ज्यादा विमान और 5,000 सैनिक भाग लेंगे। युद्धाभ्यास की घोषणा से पहले अमरीका ने रिमपैक-2018 के लिए चीन को न्योता नहीं भेजा है। इस कदम को चीन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। चीन की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इससे दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ेगा। इस मामले में अमरीका के थर्ड फ्लीट पब्लिक अफेयर्स की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार ब्राजील, इजरायल, श्रीलंका और वियतनाम पहली बार रिमपैक में हिस्सा ले रहे हैं। आपको बता दें कि अमरीका चीन से नाराज चल रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के एकाधिकारवादी रवैये का विरोध करता है। जबकि चीन इस मुद्दे पर साफ कर चुका है कि दक्षिण चीन सागर पर केवल उसी का अधिकार है। इस मामले में अमरीका को दखल देने की जरूरत नहीं है। यहां तक कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में अमरीकी युद्धपोत की गतिविधियों पर रोक लगाई है।
1971 में हुई थी शुरुआत
आपको बता दें कि रिमपैक युद्धाभ्यास का थीम सक्षम, अनुकूल, भागीदार है। अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, चिली, कोलंबिया, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया मेक्सिको, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, पेरू, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड, टोंगा और ब्रिटेन के नौसैनिक भी हिस्सा लेंगे। रिमपैक युद्धाभ्यास की शुरुआत 1971 में हुई थी।