बुधवार को वहां के बड़े अखबारों में से एक जम्हूरियत के लिए काम करने वाले पत्रकारों को 'आतंकवादी संगठनों' की मदद करने के आरोप में ये सजा सुनाई गई है।
इस्तांबुल। तुर्की में 14 पत्रकारों को एक अदालत ने कैद की सजा सुनाई है। बुधवार को वहां के बड़े अखबारों में से एक जम्हूरियत के लिए काम करने वाले पत्रकारों को 'आतंकवादी संगठनों' की मदद करने के आरोप में ये सजा सुनाई गई है। हालांकि इनमें से एक पत्रकार, जो पहले ही डेढ़ साल से जेल में हैं, उसे अदालत से जमानत मिल गई है। बता दें कि अखबार के संपादकों ने खुद पर लगे सभी आरोपों को झूठा बताया है।
सभी पत्रकारों पर आतंकी संगठनों की सहायता करने का इल्जाम
एक समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक, अदालत की तरफ से अखबार जम्हूरियत के मुख्य संपादक मुरात साबुंचु, संस्थान के सीइओ अकिन अताले व ओरहन एरिक समेत अन्य 3 पत्रकारों को 6 से 8 साल के कैद की सजा सुनाई गई है। इन सभी पत्रकारों पर आतंकी संगठनों की सहायता करने का इल्जाम है। इनमें से अताले सजा के वक्त भी जेल में ही थे, जिन्हें जमानत मिल गई है। वहीं, इसके अलावा अन्य 8 पत्रकारों को चार साल की सजा सुनाई गई है।
राष्ट्रपति की विचारधारा का आलोचक रहा है अखबार
जानकारी के मुताबिक इन पर प्रतिबंधित कुर्दिश वर्कर्स पार्टी (पीकेके), धुर वामपंथी डीएचेकेपी-सी पार्टी और गुलेन मूवमेंट जैसे संगठनों की मदद करने के आरोप लगे हैं। इनमें से गुलेन मूवमेंट पर 2016 में हुए वहां की सरकार के नाकाम तख्तापलट के साजिश में शामिल होने का आरोप है। गौरतलब है कि जम्हूरियत तुर्की के कुछ चुनिंदा अखबारों में से एक है, जो वहां के राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान के विचारधारा की आलोचना करने की हिम्मत रखता है। इस फैसले पर कई प्रतिक्रियाएं आईं है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने पत्रकारों के साथ हो रहे ऐसे सलूक की आलोचना की है।
2016 में हुआ था निष्फल सैन्य तख्तापलट
आपके बता दें कि साल 2016 की 15 जुलाई को तुर्की में एक निष्फल सैन्य तख्तापलट हुआ था। उस दौरान करीब 250 लोगों की जान गई थी। इसके साथ ही लगभग दो हजार से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे। इस सबके पीछे एफईटीओ और गुलेन आंदोलन का हाथ बताया जाता है। वहीं तुर्की के अलावा इराक और सीरिया के कुछ हिस्सों में फैले पीकेके का कुछ समय से तुर्की के साथ सशस्त्र संघर्ष चल रहा है। पीकेके को तुर्की के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमरीका और यूरोपीय संघ ने भी आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया है। पिछले कुछ वर्षों से अकेले पीकेके की वजह से 1,200 से अधिक तुर्की सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई है।