
वॉशिंगटन। अमरीकी विदेश विभाग ने एब्राम टैंक और स्टिंगर मिसाइलों सहित ताइवान को 2.2 अरब डॉलर के हथियारों की संभावित बिक्री को मंजूरी दे दी है। पेंटागन की इस घोषणा से बीजिंग के नाराज होने की संभावना है। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और उसने पहले संभावित बिक्री के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है।
अमरीकी सांसदों के पास बिक्री पर आपत्ति के लिए 30 दिन हैं लेकिन ऐसा करने की संभावना नहीं है। डीएससीए ने कहा कि प्रस्तावित टैंक बिक्री "प्राप्तकर्ता के मुख्य युद्धक टैंक बेड़े के आधुनिकीकरण में योगदान करेगी, जिससे वर्तमान और भविष्य के क्षेत्रीय खतरों को पूरा करने और अपनी मातृभूमि की रक्षा को मजबूत करने की क्षमता बढ़ेगी।"
बीजिंग ने इस महीने की शुरुआत में संभावित बिक्री के लिए अपना विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि हमने ताइवान को हथियार बेचने और वन चाइना सिद्धांत का पालन करने के उनके निर्णय की अत्यंत संवेदनशीलता को पूरी तरह समझने के लिए अमरीका पर बार-बार जोर दिया है।
1949 में गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद से ताइवान पर अलग से शासन किया गया है, लेकिन चीन यह सुनिश्चित करता है कि यदि आवश्यक हो तो बलपूर्वक इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बना लिया जाए। चीन ने ताइपे पर राजनयिक और सैन्य दबाव को काफी हद तक बढ़ा दिया है।
संयुक्त राज्य अमरीका ने 1979 में ताइवान को कूटनीतिक मान्यता दी, लेकिन ताइपे चीन का एक महत्वपूर्ण सहयोगी बना रहा। हाल के वर्षों में, वाशिंगटन ताइवान के साथ बड़े हथियारों के सौदे को पूरा करने में पूरी सावधानी बरत रहा है। इससे चीन के गुस्से का डर था।
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