एक अधिकारी के अनुसार- 'अमेरिकी सेना ने दक्षिण चीन सागर समेत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दैनिक रूप में अपना अभियान चला रखा है और सभी अभियान अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक चल रहे हैं।
अमेरिका और चीन में विवाद गहरा रहा है। ताजा खबर के अनुसार- दोनों देशों में रिश्ते और गड़बड़ा सकते हैं। दरअसल, अमेरिकी वायुसेना का एक युद्धपोत दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों में देखा गया। मीडिया रिपोर्ट में अमेरिका के दो सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि लक्ष्यभेदी मिसाइल विध्वंसक यूएसएस डेकाटूर रविवार को स्प्रैटली द्वीपों की गेवन और जॉनसन चट्टानों के 12 समुद्री मील के दायरे के भीतर देखा गया। हालांकि अमेरिकी नौसेना ने इसे नौसंचालन की स्वतंत्रता बताया है।
एक अधिकारी के अनुसार- 'अमेरिकी सेना ने दक्षिण चीन सागर समेत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दैनिक रूप में अपना अभियान चला रखा है और सभी अभियान अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक चल रहे हैं। इससे यह बताया जा रहा है कि अमेरिका हर उस जगह उड़ान भर सकता है, जलयान भेज सकता है या और कोई अभियान चला सकता है, जहां अंतर्राष्ट्रीय कानून आज्ञा देता है।'
चीन ने चेताया
दूसरी ओर, चीन ने इस घटना पर ऐतराज जताया है। चीन का आरोप है कि विवादित दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी विमान का उड़ान भरना तनाव पैदा करने का प्रयास है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध को खराब करने का दोष मढ़ा गया है। रिपोर्ट के अनुसार- बीजिंग ने वाशिंगटन को चेतावनी देते हुए अधिक परिपक्व बनने को कहा है। साथ ही ऐसे कार्यो का अंजाम भुगतने को भी कहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार- 'चीन अपने इलाके में सैन्य घुसपैठ का विरोध करता है और वह दक्षिण चीन सागर में अपने अधिकारों व हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।'
मंत्रालय के प्रवक्ता रेन गुओकियांग ने मीडिया को बताया कि हम अमेरिका से नेकनीचयती के साथ समुचित व परिपक्व व्यवहार करने और द्विपक्षीय संबंध में सुधार के लिए कदम उठाने की मांग करते हैं। हम आग्रह करते हैं कि अमेरिका, चीन के साथ मिलकर काम करे। जबकि, दूसरी ओर व्यापारिक हितों के टकराव को लेकर भी अमेरिका और चीन के बीच रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं।
चीन के रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर पर अमेरिकी बमवर्षक बी-52 के उड़ान भरने को ‘उकसावे वाली कार्रवाई’ बताया है। पेंटागन ने कहा कि पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ संयुक्त अभियान में भारी बमवर्षक शामिल हुए और एक दिन पहले इन्होंने दक्षिण चीन सागर के ऊपर, अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग से उड़ान भरी।