मुरादाबाद

बंद कमरे में बुझ गईं मासूम सांसें: अंगीठी का धुआं बना काल, परिवार पर टूटा गमों का पहाड़

Moradabad News: मुरादाबाद के छजलैट में ठंड से बचने के लिए जलाई गई अंगीठी का धुआं दो मासूम भाई-बहन के लिए जानलेवा साबित हुआ। बंद कमरे में दम घुटने से बच्चों की मौत हो गई, जबकि माता-पिता और एक भाई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं।

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बंद कमरे में बुझ गईं मासूम सांसें | AI Generated Image

Angithi smoke kills two children moradabad: यूपी के मुरादाबाद में कोयले की अंगीठी से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण चार वर्षीय आहिल और उसकी तीन वर्षीय बहन आयरा की दम घुटने से मौत हो गई। इस हादसे में बच्चों के माता-पिता और एक भाई की हालत भी गंभीर हो गई, जिन्हें तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। गांव में घटना की खबर फैलते ही मातम छा गया और हर कोई इस दर्दनाक मंजर से स्तब्ध नजर आया।

घटना के बाद जावेद की पत्नी शाहिस्ता की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके चलते उसे मुरादाबाद से हायर सेंटर मेरठ रेफर किया गया।

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शाहिस्ता अभी तक होश में नहीं आ सकी है और उसे यह तक नहीं बताया गया कि इस हादसे में उसने अपने दो मासूम बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया है। परिजन इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि जब शाहिस्ता को सच्चाई का पता चलेगा, तब वह इस गहरे सदमे को कैसे सह पाएगी।

पहले भी झेल चुके हैं बेटे की मौत का दर्द

दंपती के चार बच्चे थे शिफान, तैमूर, आहिल और आयरा। लेकिन तीन साल पहले दिल की बीमारी के कारण बेटे तैमूर की मौत हो चुकी थी। अब इस हादसे में आहिल और आयरा के चले जाने से परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर में मातम पसरा है और रिश्तेदार व ग्रामीण लगातार ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।

पूरी रात कमरे में बनती रही जहरीली गैस

भीषण ठंड से बचने के लिए उन्होंने कमरे में कोयले की अंगीठी जला ली थी। आमतौर पर दरवाजा थोड़ा खुला रखा जाता था ताकि धुआं बाहर निकल सके, लेकिन उस रात दरवाजा, खिड़की और रोशनदान पूरी तरह बंद थे। इससे कमरे में ऑक्सीजन की कमी हो गई और अंगीठी से निकलने वाला धुआं जहरीली गैस में बदलता चला गया।

दरवाजा खुलते ही सामने आया मौत का मंजर

काफी देर खटखटाने के बाद जावेद ने लड़खड़ाते कदमों से दरवाजा खोला और अर्धचेतन अवस्था में बाहर आए। अंदर का दृश्य देखकर परिजन सन्न रह गए। शाहिस्ता और तीनों बच्चे बेड पर बेहोश पड़े थे और कमरे में कोयले के धुएं की तेज गंध फैली हुई थी। शोर मचाने पर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए।

अस्पताल में चला इलाज, दो मासूमों को नहीं बचाया जा सका

जावेद, शाहिस्ता और बड़े बेटे शिफान का इलाज जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर दरवाजा खुल जाता तो शायद बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। इस बीच पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि परिजनों के अनुरोध पर बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया और शाम को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

पुलिस और डॉक्टरों ने बताई धुएं से दम घुटने की वजह

प्राथमिक जांच में अंगीठी के धुएं से दम घुटना ही मौत का कारण माना गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ठंड के मौसम में इस तरह के हीटर, ब्लोअर या अंगीठी का उपयोग करते समय पूरी सतर्कता बरतें और कमरे में वेंटिलेशन जरूर रखें।

बार-बार हो रहे हादसों से नहीं ले रहे सबक

विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरे में आग या अंगीठी जलाना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस बनती है, जो बिना किसी गंध के जानलेवा साबित हो सकती है। बावजूद इसके, लापरवाही के चलते ऐसे हादसे लगातार सामने आ रहे हैं।

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