Moradabad News: ईद-उल-अजहा से पहले सड़कों पर नमाज़ को लेकर पूर्व सांसद एसटी हसन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि कानून और सरकारी नियम हर धर्म और हर वर्ग के लिए समान होने चाहिए।
ST Hasan Statement Bakra Eid 2026: ईद-उल-अजहा से ठीक पहले सड़कों पर नमाज़ को लेकर चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस के बीच मुरादाबाद से पूर्व सांसद और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एसटी हसन का बड़ा और बेबाक बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि कानून और नियम किसी एक धर्म या समुदाय के लिए नहीं होते, बल्कि हर नागरिक पर समान रूप से लागू होने चाहिए। एसटी हसन ने कहा कि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर सरकार जो भी दिशा-निर्देश जारी करती है, उनका पालन हर वर्ग और हर धर्म के लोगों को करना चाहिए।
एसटी हसन ने सड़कों पर नमाज़ को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अक्सर कुछ मिनटों की नमाज़ को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया जाता है, जबकि कई अन्य धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान भी सार्वजनिक स्थानों का उपयोग होता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नियमों की बात की जा रही है, तो फिर हर मामले में एक समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। किसी एक समुदाय को निशाना बनाना या अलग नजरिए से देखना उचित नहीं है।
हालांकि एसटी हसन ने यह भी साफ तौर पर माना कि सड़कें आम जनता के आने-जाने और यातायात के लिए होती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक कार्यक्रम या आयोजन के कारण लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से प्रशासन और स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाकर काम किया जा रहा है, ताकि धार्मिक आस्था भी बनी रहे और आम जनता को दिक्कत भी न हो। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
पूर्व सांसद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और खासकर मुरादाबाद में पिछले दो वर्षों से सड़कों पर नमाज़ अदा नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच समन्वय बनाकर ईदगाहों और मस्जिदों के अंदर ही अलग-अलग शिफ्ट में नमाज़ अदा कराई जा रही है। इससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिल रही है और किसी प्रकार का विवाद भी पैदा नहीं हो रहा।
एसटी हसन ने कहा कि ईद के मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए अब अलग-अलग समय पर नमाज़ पढ़ाने की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि यह तरीका पिछले कुछ समय से अपनाया जा रहा है और इससे बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि आपसी सहयोग और समझदारी से किसी भी विवाद से बचा जा सकता है।
अपने बयान के अंत में एसटी हसन ने कहा कि लोकतंत्र में सबसे जरूरी बात समानता और निष्पक्षता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर सरकार जो भी नियम बनाए, वह हर धर्म और हर वर्ग पर एक समान लागू होना चाहिए। किसी भी प्रकार का भेदभाव सामाजिक सौहार्द को कमजोर करता है। उन्होंने अपील की कि धार्मिक मुद्दों को राजनीति से जोड़ने के बजाय शांति और आपसी भाईचारे के साथ देखा जाना चाहिए।