Moradabad News: मुरादाबाद के 15 साल पुराने मैनाठेर हंगामे में DM राजशेखर और DIG अशोक कुमार पर हमला करने वाले 16 आरोपितों को कोर्ट ने दोषी ठहराया। 14 को जेल भेजा गया, जबकि 2 के खिलाफ वारंट जारी कर दिए गए हैं।
Moradabad DIG DM Attack: यूपी के मुरादाबाद के मैनाठेर क्षेत्र में 2011 में हुई हिंसक घटना का फैसला 15 साल बाद आ गया। उस समय मैनाठेर पुलिस ने लूट के आरोपित को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर धर्मग्रंथ की बेहुरमती का आरोप लगाकर स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया। अफवाहें फैलने के बाद हिंसा ने पूरे क्षेत्र में तांडव मचाया।
पुलिस कार्रवाई के बाद इलाके में अफवाह फैल गई और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। डींगरपुर में प्रदर्शन के दौरान हजारों लोग इकट्ठा हुए और सड़कें अवरुद्ध कर दीं। प्रदर्शनकारियों ने संभल रोड से गुजर रहे लोगों पर हमला किया और आसपास के गांवों में घुसकर बवाल फैलाया। इस दौरान माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया था।
मुरादाबाद से मौके पर डीआईजी अशोक कुमार और डीएम राजशेखर भी पहुंचे। शुरू में अधिकारी प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। डीआईजी को खुद को बचाने के लिए पेट्रोल पंप की कोठरी में छिपना पड़ा, लेकिन भीड़ ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाल लिया। हमले में डीआईजी बुरी तरह घायल हो गए और उनकी रिवॉल्वर भी लूट ली गई।
इस मामले की सुनवाई एडीजे कोर्ट दो में हुई। मुकदमे में कुल 19 आरोपित थे, जिनमें से दो की मृत्यु हो चुकी थी और एक नाबालिग था, जिसकी फाइल अलग रखी गई थी। कोर्ट ने 16 आरोपितों को दोषी ठहराया। इस दौरान 14 आरोपित अदालत में पेश हुए और उन्हें जेल भेज दिया गया, जबकि दो आरोपी अनुपस्थित रहे और उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिए गए।
इस फैसले से मुरादाबाद में 15 साल पुराने सस्पेंस और हिंसा का अंत हो गया है। कोर्ट के सख्त रुख ने यह संदेश दिया कि कानून की नजर में कोई भी अपराध अंजाम तक पहुँचने से बच नहीं सकता। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी इस मामले में सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कदम उठाया।
इस घटना के बाद मुरादाबाद प्रशासन ने भविष्य में ऐसी हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा कड़ी करने और अफवाहों को तुरंत नियंत्रण में लाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस विभाग ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। इस फैसले ने स्थानीय लोगों में भी कानून और व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ाया है।