सदर तहसील इलाके के गांव चंदपुरा कदीम की मुन्नी देवी ने गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, के आगे मजबूर हो जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
रामपुर। रामपुर ज़िले की सदर तहसील के गांव चंदपुरा कदीम में दो दिन पूर्व हुई मां बेटी की मौत से जहां पूरा गांव सदमे में है वहीं परिवार के लोग मां-बेटी की मौत को लेकर इस कदर दुःखी हैं, कि अब उन्हें न मांगे मौत मिल रही है और ना ही ज़िला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मदद। एक ही गांव में एक-एक कर मां बेटी ने दुनिया को अलविदा क्यों कहा समझिए इस रिपोर्ट में।
दरअसल जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर सदर तहसील इलाके का गांव चंदपुरा कदीम है। इस गांव की मुन्नी देवी ने गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, के आगे मजबूर होकर जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। हलांकि परिवार वालों ने उन्हें इलाज के लिए सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक की बहू का कहना है कि उन्होंने यह कदम बेटी की मौत के सदमे और कर्जदारों के तकादे को लेकर उठाया था।
परिवार और रिश्तेदारों का कहना है कि मृतक मुन्नी देवी की बेटी ने एक दिन पहले इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। मुन्नी देवी बेटी का इलाज बीते दस सालों से करा रहीं थीं। उनकी बेटी को दौरे पड़ते थे। इलाज के लिए उन्होंने घर में रखे जेवर गिरवी रखे, ज़मीन बेची और ब्याज पर भी पैसा लिया। लेकिन उसके बावजूद भी बेटी नहीं बच सकी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसी को लेकर मुन्नी देवी ने पहले तो बेटी का दाहसंस्कार कराया और बाद में खुद जहर खा लिया। उन्हें जल्दबाज़ी करके सरकारी हॉस्पिटल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया ।
पहले बेटी बबीता की मौत और अब मां मुन्नी देवी की मौत की खबर से जहां गांव के लोग सदमे में थे वहीं परिवार के लोगों की माने तो उन पर तो जैसे दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा। क्योंकि परिवार में अब कोई बुजुर्ग सदस्य नहीं बचा है। मुन्नी देवी के पति कई साल पहले ही मर चुके हैं और अब परिवार की एकमात्र बुजुर्ग सदस्य मुन्नी देवा का भी जनाजा उठ गया।
परिवार में कुल पांच लोग हैं। उनके पास अब न तो जमीन ही बची है और ना ही कोई बैंक बैलेंस। बचा है तो सिर्फ कर्जदारों का कर्ज और मां व बहन की मौत का दर्द। जिसको न ताउम्र यह गांव भूलेगा और ना ही इस परिवार के सदस्य।
घटना की खबर प्रशासन को भी है लेकिन किसी ने भी अभी तक पीड़ित परिवार की सुध नहीं ली। इसके अलावा कोई क्षेत्रीय नेता भी अभी तक इनका हाल-चाल लेने नहीं आया। यह घटना अपने आप में जिला प्रशासन औऱ राजनेताओं की संवेदनहीनता पर बड़े सवाल खड़ी करती है। परिवार के लोगों का कहना है कि नेता और अधिकारी हम जैसे गरीब लोगों के घर क्यों आएंगे।