मुरैना

एमपी में बन रहा ‘88.4 किमी’ लंबा एक्सप्रेस-वे, 80 मिनट में पूरा होगा सफर

MP News: अटल प्रोग्रेस-वे का आखिरी अलाइनमेंट नहर किनारे स्थित बीहड़ों से तैयार किया गया है, जिसमें किसानों की बहुत कम निजी भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रही है...

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Jan 27, 2026
greenfield expressway प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - NHAI website)

MP News: साल 2026 में जिले में तीन बड़े प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इन प्रोजेक्ट में आगरा-ग्वालियर सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, अटल प्रोग्रेस वे और कैलारस शुगर मिल शामिल है। इन तीनों का काम पूरा होने से आम जनता और किसानों को बड़ा लाभ होगा।

हालांकि इन तीनों ही प्रोजेक्ट में जनता और किसान मुआवजे और एलाइनमेंट से असंतुष्ट हैं। वहीं शुगर मिल को लेकर सरकार ने खुद ही संशय पैदा कर दिया है। आज हम आपको इन तीनों प्रोजेक्ट की डिटेल, वर्तमान स्थिति और समाधान के बारे में बताएंगे।

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ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे

आगरा-ग्वालियर के बीच 4613 करोड़ की लागत से बन रहे 88.4 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे यूपी के आगरा, राजस्थान के धौलपुर और मप्र के मुरैना जिले से होकर गुजर रहा है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से आगरा-ग्वालियर के बीच सफर का समय घटकर महज 80 मिनट रह जाएगा।

वर्तमान स्थितिः ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए मुरैना जिले खासकर नूराबाद क्षेत्र में जो जमीन अधिग्रहीत की गई है, उस जमीन के भू-स्वामी किसान यूपी-राजस्थान की तर्ज पर चार गुना मुआवजा मांग रहे हैं।

समाधानः सरकार को कलेक्टर गाइड लाइन बढ़ाकर किसानों को संतुष्ट कर सकती है लेकिन मप्र सरकार इस शर्त को मानने तैयार नहीं है।

अटल प्रोग्रेस-वे

श्योपुर सहित मुरैना और भिंड जिले में 400 किमी लंबाई में चंबल एक्सप्रेस-वे की परिकल्पना की गई, लेकिन उसके बाद 8 साल में 3 बार सर्वे हो गया और 5 बार इसका नाम बदल गया, लेकिन पिछले 3 सालों से ये ठंडे बस्ते में चला गया। अब 3 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी समीक्षा की और इसके लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

वर्तमान स्थितिः अटल प्रोग्रेस-वे का आखिरी अलाइनमेंट नहर किनारे स्थित बीहड़ों से तैयार किया गया है, जिसमें किसानों की बहुत कम निजी भूमि अधिग्रहण के दायरे में आ रही है। लेकिन सबलगढ़, कैलारस और जौरा क्षेत्र के किसान अटल प्रोग्रेस-वे के लिए बीहड़ की जमीन देने को तैयार नहीं हैं। जिसके लिए उन्होंने जबरदस्ती आंदोलन किए।

समाधानः अटल प्रोग्रेस-वे के बजाय सरकार राजस्थान से यूपी के को जोड़ने वाले एनएच-552 को फोरलेन तब्दील कर सकती है। इसके लिए एनएच-552 के दोनों साइड पड़ने वाली किसानों के खेतों का मुआवजा देने में कम खर्च आएगी और प्रोजेक्ट की लागत भी कम हो जाएगी।

कैलारस शुगर मिल

वर्ष 2018, 2023 के चुनावों से ही कैलारस शुगर मिल चालू करने की मांग स्थानीय जनता कर रही है। 10 से 12 हजार किसान और 4 हजार से अधिक कर्मचारियों की प्रमुख मांग में शामिल इस शुगर मिल की मशीनरी की सरकार नीलामी कर चुकी है। वहीं शुगर मिल के स्वामित्व वाली जमीन की 3 बार नीलामी निकाली जा चुकी है।

वर्तमान स्थितिः कैलारस शुगर मिल को पुनः चालू करने का शिगूफा एक बार फिर खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छोड़ा है। उन्होंने कहा है कि किसान गन्ना उगाएं तो हम मिल चालू करने तैयार हैं। लेकिन किसानों का कहना है कि मिल चालू स्थिति में नहीं आएगी तो हम गन्ना कैसे उगाएं। क्योंकि गन्ने की फसल तो एक साल में तैयार हो जाएगी, फिर हम उसे बेचने कहां जाएंगे।

आगरा-ग्वालियर सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे में सरकार को कलेक्टर गाइड लाइन में संशोधन कराना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के एवज में किसानों को बेहतर मुआवजा मिल सके। अटल प्रोग्रेस-वे के बजाय एनएच-552 पर ही फोकस करना चाहिए। साथ ही कैलारस शुगर मिल को स्पेशल पैकेज या शुगर फेडरेशन ऑफ इंडिया से 500 करोड़ का ऋण दिलाकर चालू कराना चाहिए। - प्रदीप अवस्थी, सिविल इंजीनियर व जमीनी मामलों के जानकार

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Published on:
27 Jan 2026 05:50 pm
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