MP News: एप्रोच रोड के लिए 20 से अधिक प्लॉट के दायरे में आने वाली निजी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है।
Road Construction: 157 करोड़ लागत से मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के अंबाह में चंबल नदी के उसैद घाट और पिनाहट घाट पर बन रहे पक्के पुल का निर्माण इसी साल पूरा होने की उम्मीद जागी है। पुल का निर्माण 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उत्तरप्रदेश में एप्रोच रोड बनाने के लिए भू-अधिग्रहण न होने से पुल कंप्लीट होने में देरी हो रही थी। आगरा कलेक्टर ने धारा 31 के तहत भू-अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एप्रोच रोड के लिए 20 से अधिक प्लॉट के दायरे में आने वाली 1.28597 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की जाएगी, जिसकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। संभवतः जून महीने तक एप्रोच रोड बनाने का काम शुरू हो जाएगा।
यहां बता दें कि मध्यप्रदेश के उसैद घाट और उत्तरप्रदेश के पिनाहट घाट को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित पुल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 157 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे 825 मीटर लंबे इस पुल का लगभग 90 प्रतिशत सिविल निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। पुल के 20 में से 19 पिलर तैयार हो चुके है और सुपर स्ट्रैक्चर का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मप्र सीमा में पुल से जुड़ी एप्रोच रोड का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश की ओर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत धारा-19 की कार्रवाई शुरू कर दी है। (MP News)
उत्तरप्रदेश की ओर पुल के उतरने के लिए लगभग 1.3 हेक्टेयर निजी भूमि की आवश्यकता थी। यह जमीन कई किसानों के नाम दर्ज होने के कारण राजस्व प्रक्रिया जटिल हो गई थी। लंबे समय से फाइलें प्रशासनिक स्तर पर लंबित थीं। अब अधिसूचना जारी होने के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रशासन का दावा है कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही यूपी हिस्से में भी निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
मप्र सीमा में निर्माणाधीन बहुप्रतीक्षित पुल का लगभग 90 प्रतिशत संरचनात्मक कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसी के अनुसार अब परियोजना अंतिम चरण में पहुंच गई है। अब तक कुल 19 पिलर खड़े किए जा चुके हैं, जिन पर गार्डर पटाव का अधिकांश कार्य भी संपन्न हो गया है।
वर्ष 2015 से इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य कर रही गुजरात की सेतु निर्माण कंपनी नै तय समयसीमा में काम को आगे बढ़ाते हुए तेजी बनाए रखी है। करीब एक किलोमीटर लंबा और लगभग 40 मीटर ऊचा यह पुल क्षेत्रीय आवागमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश सीमा में एप्रोच मार्ग के लिए भूमि उपलब्ध न होने से एक पिलर और रिटर्निंग वॉल का कार्य अधूरा है। निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों का कहना है कि शेष कार्य तीन से चार महीनों में पूर्ण किया जा सकता है। मशीनरी और संसाधन तैयार है, पर वैधानिक स्वीकृति के अभाव में कार्य शुरू करना संभव नहीं है।
पुल बनने के बाद मध्यप्रदेश के अंबाह, पोरसा, गोरमी सहित मुरैना जिले के कई क्षेत्रों को उत्तर प्रदेश के पिनाहट, बाह, आगरा और फिरोजाबाद से सीधा संपर्क मिल जाएगा। अभी लोगों को चंबल पार करने के लिए बरसात में पांटून पुल हटने या लंबा चक्कर लगाकर धौलपुर या भिंड मार्ग से जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बनने के बाद आगरा से अंबाह कम हो जाएगी और हजारों ग्रामीणों की दूरी करीब 40 किलोमीटर तक को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी।
मप्र की ओर से अधिकांश निर्माण पूरा कर लिया गया है और यदि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है तो पुल का शेष कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। अनुमान है कि जून 2026 तक परियोजना को अंतिम रूप दिया जा सकता है।- मुकेश कुमार मैनेजर निर्माण एजेंसी (MP News)