
Morena News: मध्य प्रदेश के मुरैना में महज कुछ घंटे बाद जिस परिवार को बाबा महाकाल के दर्शन (Mahakal Darshan Family Tragedy) के लिए उज्जैन रवाना होना था, उसी घर में गोलियों की गूंज ने सब कुछ बदल दिया। शुक्रवार को महाकाल के दरबार में माथा टेकने की तैयारी कर रहा परिवार अब बिखर चुका है। मां की मौत हो चुकी है, पिता हत्या के आरोप में जेल में है और सास-ससुर भी इसी मामले में न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जा चुके हैं। सबसे बड़ा दर्द उस छह वर्षीय मासूम के हिस्से आया है, जिसने अपनी आंखों के सामने मां को खो दिया और एक ही दिन में पूरा परिवार बिखरते देख लिया।
जानकारी के अनुसार सेना का जवान सोहन सिंह उर्फ सोनू सिकरवार एक माह की छुट्टी लेकर घर आया था। परिवार ने उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के दर्शन का कार्यक्रम बनाया था और शुरु वार को दोनों पति-पत्नी के टिकट भी बुक थे। लेकिन बुधवार रात घरेलू विवाद के बीच चली गोली ने पूरे परिवार की तकदीर बदल दी। मासूम बेटी छवि अब अपने नाना-नानी के साथ है।
जिस मां की उंगली पकड़करउसे स्कूल जाना था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। जिस पिता के कंधों पर बैठकर वह घूमती थी, वह हत्या के आरोप में जेल पहुंच चुका है। और जिन दादा-दादी की गोद में वह खेलती थी, वे भी इसी मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। मासूम के सामने अब सबसे बड़ा सवाल उसके भविष्य का है। जांच में सामने आया है कि घटना से कुछ देर पहले तक घर में विवाद चल रहा था। पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की जांच एफएसएल, पोस्टमार्टम, बैलिस्टिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह अक्सर शाम को दोस्तों के साथ निकल जाता और देर रात शराब पीकर घर लौटता था, जिसको लेकर पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चलता था। घटना वाले दिन भी रानी अपने मायके की रिश्तेदारी में आयोजित जन्मदिन समारोह में जाना चाहती थी, जबकि पति इसके लिए तैयार नहीं था। इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी हुई। पुलिस के अनुसार विवाद के दौरान आरोपी का एक दोस्त भी घर के बाहर मौजूद था। इसी बीच पत्नी ने शराब पीने और दोस्तों के साथ देर रात तक घूमने को लेकर नाराजगी जताई। जांच के अनुसार इसके बाद आरोपी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से फायर कर दिया। मृतका के पिता का दावा है कि वारदात से करीब 40 मिनट पहले रानी ने अपनी मां को फोन कर कहा था कि ये लोग मुझे पीट रहे हैं।
इस घटना ने सिर्फ एक महिला की जान नहीं ली, बल्कि एक छह वर्षीय बच्ची का बचपन भी छीन लिया। महाकाल की यात्रा पर निकलने से पहले ही परिवार का सफर अदालत और जेल तक पहुंच गया। अब उस मासूम के हिस्से में बची हैं केवल यादें, सवाल और एक ऐसा भविष्य, जिसे संभालने की जिम्मेदारी उसके नाना-नानी पर आ गई है।