
चारों तरफ से बाढ़ में घिरा मंदिर, पुजारी नरसिंह दास (फोटो सोर्स: ANI)
Morena News : चंबल क्षेत्र में जारी लगातार बारिश से चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने से खासतौर पर इस समय मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। डोमपुरा गांव में स्थित सिद्ध बाबा मंदिर भी चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर चुका है। मंदिर के आसपास 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है, जिसके चलते गांव से उसका संपर्क पूरी तरह से टूटा हुआ है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को लगातार रेस्क्यू दल निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं। इसी बीच एक रेस्क्यू टीम जब सिद्ध बाबा मंदिर पहुंची और वहां मौजूद पुजारी नरसिंह दास को बाढ़ से बाहर लाने की बात कही तो उन्होंने मंदिर छोड़कर जाने से इंकार कर दिया। काफी देर समझाने के बाद आखिरकार रेस्क्यू टीम को पुजारी को वापस लिए बिना ही लौटना पड़ा।
बताया जा रहा है कि, पिछले दो दिन से क्षेत्र में भारी बारिश का दौर जारी है, जिसके चलते डोमपुरा गांव के आसपास नदी - नाले उफान पर हैं। गांव से कुछ दूरी पर टीले पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर धीरे - धीरे बाढ़ के पानी से घिरता चला गया। पानी बढ़ने के बाद मंदिर चारों ओर से घिर गया और किसी टापू के समान नजर आने लगा। हालात ये रहे कि, मंदिर के अंदर भी पानी पहुंचने लगा।
मंदिर की मौजूदा स्थित और उसमें पुजारी के होने की सूचना ग्रामीणों द्वारा प्रशासनिक अमले को दी गई। इसके बाद जिला प्रशासन की एक रेस्क्यू टीम नाव के जरिए पुजारी नरसिंह दास को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मंदिर पहुंची। टीम ने उन्हें समझाया कि, पानी लगातार बढ़ रहा है और किसी भी समय यहां हालात बिगड़ सकते हैं। ऐसे में उन्हें फिलहाल के लिए सुरक्षित स्थान चलना होगा, लेकिन पुजारी नरसिंह दास ने रेस्क्यू दल बिना उन्हें लिए वापस लौटने को कहा। साथ ही ये भी कहा कि, वो किसी भी परिस्थिति में मंदिर को छोड़कर नहीं जाएंगे।
रेस्क्यू टीम ने बताया कि, जब सूचना मिलने पर वो लाइफ बोट की सहायता से सिद्ध बाबा मंदिर पहुंचे तो पुजारी नरसिंह दास गर्भगृह में बैठकर पूजा कर रहे थे। मंदिर में अखंड ज्योत जल रही थी। पुजारी ने टीम के साथ जाने से इंकार करते हुए कहा कि, यह ज्योत वर्षों से अखंड जल रही है। उनके मंदिर छोड़कर जाने पर ज्योत बुझने की संभावना है। उनके जीवित रहते ये संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि, बाबा सिद्धनाथ की सेवा ही उनका जीवन है। इसलिए वो किसी भी परिस्थिति में मंदिर और अखंड ज्योत को छोड़कर नहीं जाएंगे।
Updated on:
09 Sept 2026 11:30 am
Published on:
08 Sept 2026 07:01 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
