
Morena news: एमपी के मुरैना जिले में गर्भपात के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं की बिक्री को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। शहर के कुछ मेडिकल स्टोरों पर डॉक्टर की पर्ची के बिना ही एमटीपी किट उपलब्ध कराई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि किट लेने वाले व्यक्ति से न तो डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन मांगा जा रहा है और न ही किसी तरह की चिकित्सकीय जानकारी ली जा रही है। इसके अलावा किट की कीमत को लेकर भी मनमानी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही है। निर्धारित एमआरपी से अधिक राशि लेकर दवाएं बेचने का यह तरीका दवा कारोबार के नियमों पर सवाल खड़े कर रहा है।
गर्भपात से जुड़ी दवाओं का इस्तेमाल सामान्य दवाओं की तरह नहीं किया जा सकता। गर्भ की अवधि, महिला की स्वास्थ्य स्थिति और कई अन्य चिकित्सकीय पहलुओं की जांच के बाद ही डॉक्टर इनके इस्तेमाल की सलाह देते हैं। इसके बावजूद यदि कोई मेडिकल स्टोर संचालक केवल ग्राहक की मांग पर किट थमा देता है तो यह न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि महिला की सेहत के साथ भी बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।
केसः 1
बंसल मेडिकल स्टोर, जिला अस्पताल के पास
पत्रिका : गर्भपात की किट मिल जाएगी क्या ?
संचालक : कितने माह का बच्चा है ?
पत्रिका : दो माह हुए हैं अभी
संचालक : एक किट निकाल कर दी और कहा 350 रूपए दो
पत्रिका : गर्भपात हो जाएगा, इससे ?
संचालक : गारंटी से आपका काम हो जाएगा। आप बेफ्रिक रहिए।
केस: 2
गणेश मेडिकल स्टोर, जिला आसपास के सामने
पत्रिका : गर्भपात की किट मिल जाएगी क्या ?
संचालक : कितने माह का बच्चा है ?
पत्रिका : दो माह हुए हैं अभी
संचालक मंगाना पड़ेगी दूसरी दुकान से
पत्रिका: मंगा लो, कितना समय लगेगा ?
संचालक : बस एक मिनट में आ रही है
पत्रिका : कितने रूपए लगेंगे ?
संचालक: 400 रूपए दे दो
मामले का पर एमटीपी किट के लिए पैकेट पर दर्ज कीमत से अधिक रकम मांगी जा रही है। ग्राहक के पास डॉक्टर की पर्ची नहीं होने के बावजूद उसे किट उपलब्ध कराई जा रही है और कीमत भी मेडिकल स्टोर संचालक अपनी सुविधा के अनुसार तय कर रहे है। इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि दवा दुकानों पर बिक्री की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
गर्भपात की किट किसी भी व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध कराना कानूनन अपराध है। यदि कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक ऐसा करता है तो उसका लायसेंस तक निरस्त हो सकता है। इस मामले में हम पड़ताल करेंगे, दोषी पाए जाने पर पहले नोटिस देंगे फिर आगामी कार्रवाई की जाएगी।- पदमेश उपाध्याय, सीएमएचओ, मुरैना
डॉक्टरों के अनुसार गर्भपात की दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह लेना जोखिम भरा हो सकता है। यदि गर्भ की स्थिति का सही आकलन किए बिना दवा ली जाए तो अत्यधिक रक्तस्राव, अधूरा गर्भपात या संक्रमण जैसी गंभीर स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिलने पर महिला की जान तक खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में बिना पर्चे के किट बेचने का मामला महज दवा नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता।
मुरैना में मेडिकल स्टोरों पर इस तरह की बिक्री होना औषधि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस, प्रतिबंधित और प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की बिक्री तथा बिलिंग रिकॉर्ड की जांच के लिए विभाग के पास व्यवस्था है। इसके बावजूद यदि काउंटर से बिना डॉक्टर की सलाह के एमटीपी किट आसानी से मिल रही है तो नियमित निरीक्षण पर सवाल खड़े होते हैं।