मुंबई

‘छात्रों पर दर्ज मुकदमे मुफ्त लड़ेंगे’, आदित्य ठाकरे का बड़ा ऐलान; सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के छात्रों की रिहाई का दिया आदेश

Aaditya Thackeray student protest: आदित्य ठाकरे ने NEET और CET प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता देने की घोषणा की। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
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Jul 28, 2026
Aaditya Thackeray student protest
आदित्य ठाकरे ने एलान किया है कि छात्रों पर दर्ज मुकदमे मुफ्त लड़ेंगे, फोटो सोर्स- ANI

Shiv Sena UBT free legal aid students: नीट और अन्य प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ हुए देशव्यापी छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीति चरम पर है। शिवसेना (यूबीटी) विधायक और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर आरोप लगाया कि वे प्रदर्शन में शामिल छात्रों को जानबूझकर निशाना बना रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है।

'नोटिस आए तो हमें भेजें, मुफ़्त में लड़ेंगे केस'

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि मामले वापस लेने के आश्वासन के बावजूद कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। आदित्य ठाकरे ने कहा कि 'पिछले दस दिनों से कई शहरों में युवा छात्र सड़कों पर उतरे हैं। यह गुस्सा सरकार के खिलाफ था। हमसे कहा गया था कि एफआईआर (FIR) वापस ली जाएंगी। हमने कई जगहों पर छात्रों को राहत दिलाई है और शिवसेना (UBT) ने फैसला किया है कि हम उनके केस मुफ्त में लड़ेंगे। मुख्यमंत्री को तुरंत सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए। अगर किसी भी छात्र को नोटिस मिलता है, तो वह हमें भेजे। हमारे वकील उनके केस बिना किसी फीस के लड़ेंगे।'

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और लाठीचार्ज करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र की MH-CET परीक्षा प्रक्रिया में भी घोटाले का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से रुख स्पष्ट करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के उन सभी छात्रों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

शीर्ष अदालत के मुख्य निर्देश

अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि फिलहाल छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। अदालत ने यह भी माना कि प्रथम दृष्टया छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एफआईआर (FIR) के तहत कानून के अनुसार जांच जारी रह सकती है, लेकिन अगले आदेश तक छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

Updated on:
28 Jul 2026 01:42 pm
Published on:
28 Jul 2026 01:42 pm