
12 जून 2025 को हुए अहमदाबाद विमान हादसे को एक साल पूरा हो गया है। लेकिन मुंबई की फरीदा बानो के लिए समय मानो वहीं थम सा गया है। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 में उनके बेटे जावेद अली, बहू मरियम और दो मासूम पोते-पोतियों की मौत हो गई थी। एक साल बाद भी फरीदा बानो हर दिन अपने बेटे का इंतजार करती हैं। उन्हें आज भी लगता है कि जावेद कहीं से लौट आएगा और पहले की तरह उनके पास बैठकर बातें करेगा।
यह सिर्फ एक विमान हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि उस मां के टूटे हुए दिल की दास्तान है, जिसने एक ही झटके में अपना पूरा परिवार खो दिया।
जावेद अली के भाई इम्तियाज अली बताते हैं कि हादसे के बाद उनका घर कभी पहले जैसा नहीं रहा। जावेद ब्रिटेन में रहते थे, लेकिन अक्सर मुंबई आकर परिवार के साथ समय बिताते थे। उनकी कमी आज भी महसूस होती है।
इम्तियाज कहते हैं, "ऐसा लगता है कि जावेद आज भी घर में मौजूद है।"
वहीं उनकी मां फरीदा बानो की पीड़ा शब्दों में बयां नहीं हो सकती। वह कहती हैं, "मेरा बेटा हर समय मेरे साथ रहता है। दिन हो या रात, उसकी याद कभी नहीं जाती।"
जावेद अली वर्षों पहले बेहतर भविष्य की तलाश में ब्रिटेन चले गए थे। वहीं उनकी मुलाकात मरियम से हुई और दोनों ने शादी कर ली। उनके दो बच्चे जैन और अमानी का जन्म भी ब्रिटेन में हुआ।
भारत की यह यात्रा परिवार के लिए बेहद खास थी। पहली बार जावेद अपने बच्चों को भारत और अपने रिश्तेदारों से मिलवाने लाए थे। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद यह सफर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।
हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से केवल एक यात्री जीवित बच पाया था।
एक साल बीत जाने के बाद भी फरीदा अक्सर शाम होते ही वह अकेले कब्रिस्तान जाती हैं। अपने बेटे की पसंद का खाना साथ लेकर जाती हैं। कब्र के पास बैठकर वह धीरे से कहती हैं, "देखो बेटा, मैं आ गई हूं। तुमसे मिलने आई हूं।"
हादसे के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी फरीदा बानो को यह दुखद खबर देना। वह पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित थीं और डॉक्टरों को डर था कि यह सदमा वह झेल नहीं पाएंगी।
शुरुआत में उन्हें सिर्फ इतना बताया गया कि विमान का एक्सीडेंट हुआ है और बहू व बच्चे घायल हैं। लेकिन वह बार-बार एक ही सवाल पूछती रहीं, "जावेद कहां है?"
इम्तियाज बताते हैं कि उन्होंने मां से झूठ बोला कि सब ठीक हैं। लेकिन एक मां का दिल सब समझ चुका था।
जब उन्हें अहमदाबाद ले जाया गया और परिवार के सभी लोग एक कमरे में इकट्ठा दिखे, तो उन्होंने बिना कुछ कहे सब समझ लिया।
बेटे की मौत का सदमा फरीदा बानो की सेहत पर भी भारी पड़ा। पिछले साल सितंबर में उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टरों को उनके दिल में तीन और स्टेंट लगाने पड़े। अब उनके हृदय में कुल पांच स्टेंट हैं।
परिवार के अनुसार, जब भी वह जावेद को याद कर रोती हैं, उनका शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ जाता है।