
एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की मां डॉ. मधु चोपड़ा (photo source-IMDb)
Priyanka Chopra mother: दिल्ली में 20 जुलाई को हुए 'संसद चलो' मार्च को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की मां डॉ. मधु अखौरी चोपड़ा ने प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया, जिस पर मौके पर मौजूद एक स्वतंत्र पत्रकार ने विस्तार से जवाब देते हुए उनके दावे को खारिज किया। दोनों के बीच हुई ये ऑनलाइन बातचीत अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच एक स्वतंत्र पत्रकार के जरिए किए गए वीडियो पर प्रियंका चोपड़ा की मां डॉ. मधु अखौरी चोपड़ा की टिप्पणी ने नई बहस छेड़ दी।
पत्रकार ने अपने वीडियो में दावा किया कि वो सुबह 6 बजे से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थीं। उनके अनुसार शुरुआती घंटों तक माहौल सामान्य था, लेकिन दोपहर के बाद स्थिति अचानक बदल गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
वीडियो में पत्रकार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बाधित होने से लोगों को हालात की सही जानकारी नहीं मिल पा रही थी। उनका दावा था कि बैरिकेटिंग की वजह से लोग सीमित इलाके में फंस गए थे और बाहर निकलने या वापस प्रवेश करने में भी मुश्किलें आ रही थीं।
इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल थे, जो बेहतर शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे थे। पत्रकार के मुताबिक, महिलाओं और बच्चों की मौजूदगी के बावजूद हालात तनावपूर्ण हो गए।
पत्रकार के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. मधु चोपड़ा ने पूछा कि क्या प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों को "ह्यूमन शील्ड" के तौर पर यूज किया गया था। उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि क्या प्रदर्शनकारियों को अपने कदमों के संभावित परिणामों का अंदाजा नहीं था।
डॉ. चोपड़ा की टिप्पणी पर पत्रकार ने विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि किसी भी महिला या बच्चे का इस्तेमाल ह्यूमन शील्ड के रूप में नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि भारी बैरिकेटिंग के कारण जगह कम होने से भीड़ सड़क की ओर बढ़ी थी और जब हालात बिगड़े तो कुछ महिलाएं स्वेच्छा से एक-दूसरे की मदद और सुरक्षा के लिए आगे आईं। उनका कहना था कि किसी को भी जानबूझकर ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन में मौजूद कई महिलाओं ने खुद को भीड़ के बीच सुरक्षित महसूस किया और बच्चों के साथ आए अभिभावकों का उद्देश्य उन्हें किसी तरह की ढाल बनाना नहीं था। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों की टिप्पणियों के बाद ये मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग अपने-अपने नजरिए से इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
Updated on:
27 Jul 2026 07:37 pm
Published on:
27 Jul 2026 07:37 pm
