
KDMC Hospital Controversy: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों सिर्फ दांव-पेंच नहीं, बल्कि अस्पताल के भीतर की 'दबंगई' पर भी घमासान मचा हुआ है। कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के एक अस्पताल में महिला डॉक्टरों और नर्सों के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट का मामला अब राजनीतिक दंगल का अखाड़ा बन चुका है। एक तरफ जहां उद्धव गुट के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है, वहीं दूसरी तरफ आरोपी कॉर्पोरेटर ने बचाव में एक ऐसा 'कैमरा एंगल' वाला तर्क दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब शिंदे गुट के शिव सेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे पर अस्पताल की महिला मेडिकल स्टाफ के साथ बदसलूकी और हाथ उठाने के गंभीर आरोप लगे। घटना का कथित सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इस मामले पर जब म्हात्रे से सवाल किया गया, तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीब दलील दी। म्हात्रे ने कहा कि मैंने किसी महिला डॉक्टर पर हाथ नहीं उठाया। सीसीटीवी फुटेज में जो दिख रहा है, वह असल में कैमरे के एंगल की वजह से वैसा लग रहा है। वह नर्स तो मेरी बेटी जैसी है, इसलिए मैं उसे 'तू' कहकर बात कर रहा था। हम अस्पताल की दिक्कतों को लेकर बात कर रहे थे, लेकिन वह लगातार फोन पर लगी थी और हमारी बात नहीं सुन रही थी। बस इसीलिए मैंने उसके हाथ पर हल्का सा थपथपाया था। म्हात्रे ने कहा कि वे बालासाहेब के संस्कारों को मानने वाले लोग हैं और महिलाओं पर कभी हाथ नहीं उठा सकते।
कॉर्पोरेटर की इस 'बेटी और कैमरे वाली थ्योरी' पर विपक्ष का गुस्सा चारों ओर फूट पड़ा है। संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि मुख्यमंत्री, अपने पास मौजूद गृह मंत्रालय के पद की थोड़ी तो पूजा कर लीजिए! कोरोना के दौर में जनता की जान बचाने वाले इन सफेद कपड़ों के फरिश्तों (महिला डॉक्टरों और नर्सों) को मिंधे गैंग के गुंडे अस्पताल में घुसकर बेरहमी से पीट रहे हैं। क्या आपकी नजर में यही कानून का राज है? राउत यहीं नहीं रुके, उन्होंने बेहद कड़े लहजे में मांग कर डाली कि इन गुंडों को हथकड़ी लगाकर सिर्फ चड्डी और बनियान में सड़कों पर सरेआम घुमाया जाना चाहिए।