Baramati Bypoll Sunetra Pawar vs Akash More: एनसीपी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को फोन किया और बारामती विधानसभा क्षेत्र में निर्विरोध उपचुनाव के लिए समर्थन मांगा।
महाराष्ट्र की हाई-प्रोफाइल सीट बारामती में विधानसभा उपचुनाव का रण अब पूरी तरह सज चुका है। वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद रिक्त हुई इस सीट पर भाजपा नीत महायुति गठबंधन की ओर से सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) चुनावी मैदान में हैं। हालांकि, महायुति इस चुनाव को निर्विरोध कराने की कोशिश में थी, लेकिन कांग्रेस की ओर से आकाश मोरे को प्रत्याशी बनाये जाने के कारण अब यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सुनेत्रा पवार ने खुद उद्धव ठाकरे और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को फोन कर समर्थन मांगा था, इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी। जबकि उद्धव की शिवसेना (UBT) और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने बारामती उपचुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए है।
महायुति की ओर से इस उपचुनाव को निर्विरोध कराने के प्रयास किए जा रहे थे। इसके लिए सुनेत्रा पवार ने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से समर्थन की अपील भी की थी। हालांकि कांग्रेस ने इन प्रयासों को ठुकराते हुए अधिवक्ता आकाश मोरे को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने से महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के अंदर भी नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी गठबंधन एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना उद्धव गुट और एनसीपी शरद गुट शामिल है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकल ने पहले ही कहा था कि चुनाव और सहानुभूति दो अलग बातें हैं। जबकि एनसीपी (शरद पवार) ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह बारामती क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले दिवंगत अजित पवार के सम्मान में उपचुनाव नहीं लड़ेगी। उद्धव गुट ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं है, लेकिन चुनाव नहीं लड़ने के पक्ष में दिख रही है।
अब तक बारामती उपचुनाव के लिए 19 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जबकि आज सुनेत्रा पवार और आकाश मोरे भी अपना नामांकन भरेंगे। साथ ही ओबीसी कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके के भी चुनाव मैदान में उतरने की संभावना है, जिससे उम्मीदवारों की संख्या 20 के पार जा सकती है।
हालांकि बारामती के चुनावी अखाड़े में नया मोड़ तब आया, जब कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे ने नाम वापस लेने के लिए एक बड़ी शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुख्य विरोध भाजपा से है। साथ ही उन्होंने अजित पवार के विमान हादसे की जांच का मुद्दा भी उठाया।
मोरे ने साफ कहा कि अगर राज्य सरकार अजित पवार के विमान दुर्घटना मामले में महाराष्ट्र में केस दर्ज करती है, तो वे अपनी उम्मीदवारी वापस लेने पर विचार करेंगे। इसको लेकर उन्होंने पार्टी हाईकमान से चर्चा भी की है।
बारामती उपचुनाव के लिए 23 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। फिलहाल बारामती में सुनेत्रा पवार का पलड़ा भारी माना जा रहा है, लेकिन धनगर और ओबीसी वोटों के समीकरण चुनाव को रोचक बना सकते हैं।
वर्तमान में सुनेत्रा पवार न तो विधायक और न ही विधान परिषद सदस्य (MLC) हैं। उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। वह आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल करेंगी। महायुति में भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे), एनसीपी (सुनेत्रा पवार) शामिल है।
बारामती लंबे समय से पवार परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। अजित पवार यहां से लगातार बड़े अंतर से 8 बार जीत चुके थे। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने भतीजे और एनसीपी (एसपी) उम्मीदवार युगेंद्र पवार को 1,00,899 वोटों से हराया था। अजित पवार को 1,81,132 वोट मिले थे, जबकि युगेंद्र पवार को 80,233 वोट मिले थे।
अजित पवार ने 1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में बारामती विधानसभा सीट पर भारी अंतर से जीत हासिल की। ऐसे में सुनेत्रा पवार के सामने इस बार अपने पति की पारंपरिक सीट को बरकरार रखने की चुनौती है।