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‘उनसे हम सीखते हैं’, टॉप नेताओं पर लगा आरोप, तो बचाव में उतरे अजित पवार के बेटे पार्थ

NCP: अजित पवार के बड़े बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को निशाना बनाकर निराधार खबरें फैलाई जा रही हैं। इस बयान के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

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Updated: 3 Apr 2026, 5:23 PM IST

NCP Sunetra Pawar parth pawar

सुनेत्रा पवार के साथ सांसद बेटे पार्थ पवार (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर लगे आरोपों के बीच अब दिवंगत नेता अजित पवार के बड़े बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार खुद मैदान में उतर आए हैं। पार्थ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया है।

पार्थ पवार ने कहा कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने दशकों से प्रतिबद्धता और नेतृत्व का प्रदर्शन किया है, जो पार्टी और हम सभी का मार्गदर्शन करता आ रहा है। लेकिन इस तरह के निराधार आरोप बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इनकी निंदा की जानी चाहिए। उनका यह बयान उन अटकलों के बीच आया है कि उनकी मां और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पटेल और तटकरे से नाराज हैं।

क्या है मामला?

बता दें कि सुनेत्रा पवार ने 10 मार्च को चुनाव आयोग को अपनी नियुक्ति की जानकारी दी थी। इसके साथ उन्होंने 14 पदाधिकारियों की सूची भी भेजी। इस सूची में खुद को पार्टी अध्यक्ष और शिवाजीराव गार्जे को कोषाध्यक्ष बताया गया है। हालांकि, इस सूची में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल जैसे बड़े नेताओं के पदों का कोई जिक्र नहीं था। जबकि प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष और सुनील तटकरे महाराष्ट्र एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। यही बात राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गई।

इससे पहले, शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु के बाद एनसीपी पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पर लगाया था।  

रोहित पवार ने प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया था कि सुनेत्रा पवार ने 10 मार्च को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपनी नियुक्ति की जानकारी दी थी और कहा था कि उनके पति अजित पवार के निधन के बाद पार्टी से प्राप्त किसी भी संदेश को नजरअंदाज कर दिया जाए।

उन्होंने दावा किया था कि 28 जनवरी को अजित पवार की मौत से ठीक 18 दिन बाद 16 फरवरी को चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र में एनसीपी (अजित गुट) नेताओं के एक ग्रुप ने पार्टी के संविधान में बदलाव कर कार्यकारी अध्यक्ष को अजित पवार के सारे अधिकार देने की मांग की गई थी।

रोहित पवार ने कहा कि इस पत्र की जानकारी न तो सुनेत्रा पवार को और न ही पार्थ और जय पवार को दी गई थी। वहीं, इस संबंध में पटेल और तटकरे द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण से सुनेत्रा पवार भी असंतुष्ट थीं।