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‘सुनेत्रा पवार का नेतृत्व पसंद नहीं तो छोड़ दें पार्टी’, एनसीपी के विलय पर छिड़ी रार

NCP Merger News: एनसीपी (NCP) विधायक सुनील शेलके ने कहा है कि अगर किसी को सुनेत्रा पवार का नेतृत्व पसंद नहीं है, तो वह पार्टी छोड़ सकता है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

Mar 29, 2026

NCP Sunetra Pawar parth pawar

सुनेत्रा पवार के साथ सांसद बेटे पार्थ पवार (Photo: IANS)

महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के विलय की चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस बीच, अजित पवार गुट के एनसीपी विधायक सुनील शेलके ने एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शेलके ने स्पष्ट किया है कि जो लोग एनसीपी प्रमुख सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर सकते, उनके लिए दूसरी पार्टी के दरवाजे खुले हैं।

'अजित दादा के बाद विलय करना सही'

अजित पवार के असामयिक निधन के बाद से ही शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाली दोनों एनसीपी गुटों के एक साथ आने की अटकलें लगाई जा रही थीं। विधायक सुनील शेलके के ताजा बयान ने इन चर्चाओं को और पुख्ता कर दिया है। शेलके के अनुसार, "जब अजित दादा सत्ता में थे, तब दोनों ही दल महाराष्ट्र और देश की राजनीति में मिलकर काम करना चाहते थे। ऐसे में दादा के जाने के बाद यदि दोनों गुट एकजुट होते हैं, तो इसमें किसी को बुरा लगने जैसी कोई बात नहीं है।"

सुनेत्रा पवार के हाथों में होगी कमान

उन्होंने यह भी कहा कि अगर दोनों गुटों का विलय होता है, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और ज्यादा मजबूत बनेगी। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी का विस्तार हो रहा है और आने वाले समय में संगठन और भी तेजी से बढ़ सकता है। उनका मानना है कि अगर एनसीपी एकजुट होती है तो महाराष्ट्र और देश के स्तर पर एनसीपी की ताकत बहुत बढ़ जाएगी।

नाराज नेताओं को दो टूक कहा- छोड़ दें पार्टी

अपने बयान में एनसीपी विधायक ने साफ कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और अजित पवार के समर्थकों के लिए यह एक सकारात्मक स्थिति होगी। लेकिन जो लोग सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में काम करने में असहज महसूस करते हैं, वे दूसरी पार्टी में जाने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन जो लोग अजित दादा को मानते हैं, नए नेतृत्व को स्वीकार करते हैं और पार्टी को आगे ले जाना चाहते हैं, वे सभी सुनेत्रा पवार का समर्थन करेंगे।

उनके इस बयान को पार्टी के अंदरूनी मतभेदों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर पहले से ही अलग-अलग राय सामने आती रही है। ऐसे में विधायक सुनील शेलके का यह बयान उन असंतुष्ट नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है जो अजित पवार के निधन के बाद नेतृत्व परिवर्तन या विलय को लेकर खुश नहीं हैं।

रोहित पवार का बड़ा आरोप

पिछले हफ्ते एनसीपी (शरद पवार) नेता रोहित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि दोनों ने प्लेन क्रैश में अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी अजित गुट पर कब्जा करने की कोशिश की थी।

उन्होंने कहा कि 28 जनवरी को अजित पवार की मौत से ठीक 18 दिन बाद, 16 फरवरी को चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया था। इसका मकसद पार्टी की सारी ताकत और अधिकार, जो पहले अजित दादा के पास थे, उन्हें प्रफुल्ल पटेल को देना था। यह सुनेत्रा पवार, पार्थ पवार, या पार्टी के विधायकों की जानकारी के बिना किया गया था। प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष है, जबकि सुनील तटकरे महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष है।  

शरद गुट के विधायक रोहित पवार ने दावा किया कि नेताओं के एक ग्रुप ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पार्टी के संविधान में बदलाव करके कार्यकारी अध्यक्ष को अजित दादा के सारे अधिकार देने को कहा था। लेकिन इसके बाद सुनेत्रा पवार ने आयोग को पत्र लिखकर कहा कि अजित पवार की मौत के बाद से उनके अध्यक्ष पद संभालने तक मिले किसी भी पत्र को नजरअंदाज किया जाए।

इस बीच, सुनील शेलके के ताजा बयान ने हलचल बढ़ा दी है। क्या दोनों एनसीपी वास्तव में एक झंडे के नीचे आएंगे? और यदि ऐसा होता है, तो सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महाविकास अघाड़ी गठबंधन (MVA) के समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ेगा? यह सवाल आने वाले समय में महाराष्ट्र की सियासत का भविष्य तय करेंगे।