BJP Ticket Controversy: नगर निगम चुनाव से पहले नागपुर में टिकट और नामांकन से संबंधित पार्टी के फैसलों से नाराज होकर कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन पर उतर आए। बात इतनी आगे बढ़ गई कि उन्होंने किसन गावंडे को उनके ही घर में बंद कर दिया।
BJP Ticket Controversy: 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव से ठीक पहले नागपुर में वार्ड नंबर 13 में सियासी हलचल उस समय बहुत तेज हो गई, जब बीजेपी ने एबी फॉर्म जारी करने के बाद भी अपने एक नेता से नामांकन वापस लेने को कहा। पार्टी के इस फैसले से कार्यकर्ताओं में साफ नाराजगी देखने को मिली। यह तनाव इस स्तर तक पहुंच गया कि स्थिति विरोध और हाईवोल्टेज ड्रामा तक पहुंच गई। इस पूरी घटना से स्थानीय राजनीति में भूचाल आ गया है और साथ ही इससे बीजेपी की रणनीति पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि क्या किसन गावंडे अब निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
बीजेपी ने वार्ड नंबर 13 से किसन गावंडे और विजय होले को एबी फॉर्म जारी किए थे। एबी फॉर्म जारी करने का मतलब होता है कि उस इलाके के उम्मीदवार को पार्टी से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इससे सबको यह लगा कि किसन गावंडे ही वार्ड नंबर 13 के उम्मीदवार हैं। लेकिन ऐसे में नामांकन वापसी की आखिरी तारीख पर गावंडे को पार्टी ने पीछे हटने के लिए कह दिया। इस पूरे घटनाक्रम से वहां की स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई और कार्यकर्ताओं ने इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
जैसे ही उनके नामांकन से पीछे हटने की बात फैली, उनके समर्थक भड़क गए। साथ ही गावंडे के घर के बाहर ताला लगा दिया गया जिसकी वजह से गावंडे और उनके परिवार वाले घर के अंदर ही फंस गए। समर्थकों का कहना है कि उनके साथ पार्टी ने अन्याय किया है। इस तनाव भरे माहौल के बीच में गावंडे ने लोगों से हाथ जोड़ते हुए कहा कि वह उनकी भावनाओं को समझते हैं, लेकिन पार्टी का आदेश मानना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से कई बार ताला खोलने की अपील की लेकिन कार्यकर्ताओं ने गुस्से में उनकी एक नहीं सुनी।
स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि मौके पर बीजेपी के एमएलसी परिणय फुके पहुंचे। उन्होंने मौके पर मौजूद नाराज कार्यकर्ताओं से बातचीत की और माहौल को थोड़ा शांत करने का प्रयास किया। काफी देर बातचीत के बाद उन्होंने गावंडे के घर का ताला खोला। फुके ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि सभी उम्मीदवारों और नेताओं के साथ मीटिंग की जाएगी और देवेंद्र फडणवीस के सामने बात रखी जाएगी। वह जो फैसला लेंगे, वही माना जाएगा। पिछले 20 सालों में हजारी पहाड़ इलाके के सभी विकास कार्य गावंडे के जरिए ही हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं का भी सम्मान किया जाएगा।
द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए गावंडे ने पुष्टि की कि उन्होंने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के किसी भी निर्णय से मुझे कोई नाराजगी नहीं है। कार्यकर्ताओं को शांत होने में समय लगेगा, लेकिन मैं उनसे कल बात करूंगा और उन्हें ऐसे विरोध नहीं करने को समझाऊंगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी जो भी फैसला लेगी, मुझे मंजूर होगा। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इससे क्षेत्र के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा।