
Bombay High Court on FDA: महाराष्ट्र में पिछले कुछ महीनों से खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की लगातार छापेमारी और कार्रवाई के बीच अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नवी मुंबई के एक पांच सितारा होटल का फूड लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि क्या कार्रवाई केवल निजी प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रहेगी? अदालत ने FDA को मंत्रियों के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों, मंत्रालय, सरकारी और अर्धसरकारी कार्यालयों की कैंटीनों की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ नवी मुंबई के एक पांच सितारा होटल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। होटल ने अपने फूड लाइसेंस को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने FDA की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक-दो कॉकरोच दिखाई देने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, "कुछ दिन पहले मेरी डेस्क पर एक बड़ा कॉकरोच था, तो क्या मुझे काम बंद कर देना चाहिए?"
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एफडीए से सवाल किया कि अब तक उसने कितने मंत्रियों के प्रतिष्ठानों और सरकारी संस्थानों पर छापेमारी की है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मंत्रालय, हाईकोर्ट परिसर, सरकारी और अर्धसरकारी संस्थानों की कैंटीनों और भोजन व्यवस्था की भी तत्काल जांच की जाए तथा निरीक्षण रिपोर्ट शुक्रवार तक अदालत में पेश की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए और कार्रवाई में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित पांच सितारा होटल में 95 प्रतिशत स्वच्छता पाई गई, जबकि नियमों के अनुसार 79 प्रतिशत स्वच्छता पर्याप्त मानी जाती है। इस आधार पर हाई कोर्ट ने होटल को राहत देते हुए कहा कि कार्रवाई करते समय वहां कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
इस बीच एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में महाराष्ट्र एफडीए ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्यभर के स्कूलों के आसपास जंक फूड पर भी बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। आईएएस तुकाराम मुंडे ने घोषणा की है कि स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में अधिक वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों (HFSS Foods) की बिक्री, विज्ञापन और मुफ्त वितरण पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश पूरे राज्य में सख्ती से लागू किया जाएगा।
राज्य सरकार ने 27 जुलाई को इस संबंध में अनुपालन आदेश जारी किया है। इसके तहत महाराष्ट्र के लगभग 1.08 लाख स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 2 करोड़ छात्रों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
मुंढे ने बताया कि सभी स्कूल कैंटीन, मिड-डे मील रसोई, छात्रावास की रसोई और स्कूलों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने वाले संस्थानों के लिए खाद्य सुरक्षा कानून के तहत पंजीकरण और वैध लाइसेंस अनिवार्य होगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण या वैध लाइसेंस के कोई भी संस्था स्कूलों, छात्रावासों या मिड-डे मील योजना के लिए भोजन तैयार या आपूर्ति नहीं कर सकेगी।
FDA आयुक्त ने कहा कि छात्रों को सब्जियां, फल, दूध, डेयरी उत्पाद और प्रोटीन युक्त पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहीं अधिक वसा, नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि इन नियमों के पालन की प्राथमिक जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और स्थानीय प्रशासन की होगी, ताकि बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
नागपुर नगर निगम (NMC) के आयुक्त पद से तुकाराम मुंडे के तबादले के विरोध में नागपुर में स्थानीय लोगों ने किया था प्रदर्शन-