
Bombay High Court on FDA: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे की एक मिठाई की दुकान को 34 दिनों तक बंद रखने के मामले में अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने एफडीए की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही दुकान का लाइसेंस निलंबित करने के आदेश को रद्द करते हुए उसे दोबारा खोलने की अनुमति दे दी है।
यह मामला पुणे की गुरु नानक डेयरी से जुड़ा है। खाद्य विषाक्तता की शिकायत मिलने के बाद 12 जून को एफडीए की टीम ने दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान साफ-सफाई और कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर असंतोष जताया था। इसके बाद एफडीए ने दुकान का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।
इसके बाद एफडीए ने दोबारा दुकान का निरीक्षण किया। इस जांच में दुकान की ओर से खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े नियमों का 98 प्रतिशत अनुपालन पाया गया। इसके बाद दुकान के मालिक ने एफडीए से लाइसेंस निलंबन का आदेश वापस लेने की मांग की, लेकिन विभाग की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एफडीए की ओर से राहत नहीं मिलने के बाद दुकान के मालिक ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में दावा किया गया कि 12 जून की कार्रवाई के बाद दुकान 34 दिनों तक बंद रही, जिससे करीब 8.74 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने माना कि दोबारा जांच करने का उद्देश्य सराहनीय है, लेकिन एफडीए की कार्रवाई जरूरत से ज्यादा कठोर थी। अदालत ने एफडीए के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विभाग को अपने अधिकारों का इस्तेमाल विवेकपूर्ण और कानून के मुताबिक करना चाहिए।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एफडीए की कार्रवाई कुछ मामलों में विचित्र नजर आती है। हाई कोर्ट ने कहा कि कार्रवाई करने से पहले संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों पर उचित तरीके से विचार किया जाना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब बॉम्बे हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले कैडिला फार्मास्युटिकल्स (Cadila Pharmaceuticals) से जुड़े एक मामले में भी अदालत ने एफडीए की अचानक की गई कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की थी। एफडीए ने कंपनी के खिलाफ अचानक जब्ती और दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की कार्रवाई की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने एफडीए को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा था कि उसके पास अधिकारों की 'तलवार' है, लेकिन उसका इस्तेमाल विवेक के साथ किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा था कि पहले कार्रवाई करना और बाद में सवाल पूछना यह तरीका स्वीकार्य नहीं हो सकता। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नियामक संस्थाओं को अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते समय उचित कानूनी प्रक्रिया और विवेक का पालन करना जरूरी है।
नवी मुंबई के एक पांच सितारा होटल का फूड लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एफडीए की कार्रवाई की आलोचना की थी। अदालत ने कहा था कि केवल एक-दो कॉकरोच दिखाई देने के आधार पर किसी होटल का लाइसेंस रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, "कुछ दिन पहले मेरी डेस्क पर एक बड़ा कॉकरोच था, तो क्या मुझे काम बंद कर देना चाहिए?"
पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने तुकाराम मुंढे के नेतृत्व वाले एफडीए को पलट दिया था। अदालत ने छत्रपति संभाजीनगर, जालना, जलगांव और अहिल्यानगर की 8 डेयरियों के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। तब याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि एफडीए ने नियमानुसार सुधार के लिए 14 दिनों का समय दिए बिना ही सीधे लाइसेंस निलंबित कर दिया, जो कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है।