
CJP Abhijeet Dipke: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज में कीलों वाली लाठियों का इस्तेमाल किया गया और पेलेट गन भी चलाई गई। दीपके ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम स्तब्ध करने वाला था। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि शायद आने वाले पांच वर्षों में सीजेपी आउटडेटेड हो जाएगी, तब कोई और आंदोलन शुरू करेगा, और लोकतंत्र के लिए यही सही भी है।
'एबीपी माझा' के एक विशेष कार्यक्रम में बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को संसद मार्च से पहले की परिस्थितियों, आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं और अपनी पार्टी की भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी राजनीति में आने की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा कभी नहीं रही। उन्होंने कहा, "अगर मुझे राजनीतिक महत्वाकांक्षा होती तो मैं अमेरिका नहीं गया होता। मेरा सपना तो अपने गांव का सरपंच बनने का था।" उन्होंने कहा कि बचपन में जिस भारत को उन्होंने देखा था और आज का भारत, दोनों में काफी अंतर है।
दीपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दलों को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। महाराष्ट्र में ही शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) जैसी पार्टियां भी इसी तरह तोड़ी गईं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब वह आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ सक्रिय राजनीति में थे, तब का भारत और आज का भारत पूरी तरह अलग है। वर्तमान राजनीति में जाति और धर्म के आधार पर विभाजन बढ़ा है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुई हैं। उस समय कुछ लोकतंत्र बचा हुआ था, पर अब कोई लोकतंत्र नहीं बचा है।
सीजेपी प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी पूर्णकालिक स्वयंसेवकों के साथ विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर विशेषज्ञ समूह तैयार किए जाएंगे, जो समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव लोकतांत्रिक विकल्प अपनाएंगे।
दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी खुद को एक राजनीतिक दबाव समूह के रूप में विकसित करना चाहती है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में जितने अधिक दबाव समूह होंगे, व्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी।
अभिजीत दीपके ने कहा कि सीजेपी आने वाले पांच सालों में पुरानी या अप्रसांगिक हो सकती है, लेकिन उसके बाद कोई नया युवा समूह आगे आकर जनआंदोलन की बागडोर संभालेगा, जो कि लोकतंत्र के लिए बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति या एक राजनीतिक दल के भरोसे नहीं चल सकता। यदि जनता अपनी सारी उम्मीदें केवल एक नेता या एक पार्टी से जोड़ ले, तो यह लोकतंत्र के लिए घातक होगा।