Satara Doctor Death: महाराष्ट्र के एक सरकारी अस्पताल की महिला डॉक्टर की आत्महत्या ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। इस मामले में कई गहरे राज सामने आ रहे हैं।
महाराष्ट्र के सतारा जिले के फलटण उपजिला अस्पताल में कार्यरत महिला डॉक्टर की मौत के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि डॉक्टर के हाथ पर लिखे कथित सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग उसी की है। 28 वर्षीय महिला डॉक्टर 22 अक्टूबर को होटल के कमरे में मृत मिली थीं। जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली लोग उन पर गलत मेडिको लीगल (Medico-Legal) रिपोर्ट बनाने का दबाव बना रहे हैं। जब उन्होंने उनकी बात नहीं मानी तो उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया गया। महिला डॉक्टर ने अपने हाथ पर मरने से पहले एक नोट लिया था, उसमें एक पुलिस अधिकारी समेत दो लोगों के नाम थे, जिससे जांच की दिशा बदल गई। यह मामला आज महाराष्ट्र विधानसभा में उठा।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक अमित साटम ने सरकार से पूछा कि क्या नोट की लिखावट डॉक्टर की ही है और जिन दो लोगों के नाम लिखे थे, क्या वे वास्तव में उसे परेशान कर रहे थे। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि फॉरेंसिक जांच में यह बात साफ हो गई है कि नोट डॉक्टर ने खुद लिखा था। जांच में पाया गया कि लिखावट उसकी अपनी लिखावट से मेल खाती है।
फडणवीस ने बताया कि जांच में बर्खास्त पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) गोपाल बदने पर गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। फडणवीस ने कहा, "जांच के दौरान पता चला है कि बदने ने शादी का वादा करके उसका यौन शोषण किया। जबकि दूसरे आरोपी प्रशांत बनकर (Prashant Bankar) ने भी महिला डॉक्टर को धोखा दिया।“
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस घटना के पीछे और भी लोग जिम्मेदार है। साथ ही एक महिला IPS अधिकारी इस मामले की अलग से जांच कर रही हैं। हमारी सरकार पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने वाले नेताओं को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने बताया कि डॉक्टर 11 महीने के अनुबंध पर काम कर रही थीं, इसलिए नियमों के अनुसार परिवार को सरकारी नौकरी जैसे अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके, सरकार ने पीड़ित परिवार को हर संभव आर्थिक और कानूनी मदद देने का आश्वासन दिया है।