
Shiv Sena UBT Split: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक भूकंप आने के संकेत मिल रहे हैं। 2022 में शिवसेना में हुई ऐतिहासिक टूट के चार साल बाद अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। पिछले कई दिनों से चर्चा में बना 'ऑपरेशन टाइगर' अब जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के छह लोक सभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का साथ देने का फैसला कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से छह सांसद आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर ठाकरे गुट से अलग होने और शिंदे गुट को समर्थन देने की घोषणा कर सकते हैं। इस बीच, लोक सभा में शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले किसी भी कथित अलग या बागी समूह को स्वतंत्र मान्यता, विशेषाधिकार या अलग दर्जा न दिया जाए। कोई भी निर्णय लेने से पहले उनका पक्ष जरुर जाना जाये।
उधर, बीती रात को ही उद्धव गुट के कुछ सांसदों और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दिल्ली पहुंचने की भी खबर है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि इस बागी माने जाने वाले समूह को केंद्र सरकार में एक मंत्री पद मिल सकता है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व प्रमुख व वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं बल्कि 'ऑपरेशन गीदड़' है। पटोले ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सहयोगी दल सत्ता की भूख में सारी हदें पार कर रहे हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरे दलों के जीते हुए जनप्रतिनिधियों को अपने साथ लेकर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की जा रही है।
संजय राउत द्वारा लगाए गए 15-15 करोड़ के एडवांस वाले आरोप पर पटोले ने कहा, "वे इससे भी ज्यादा पैसे दे सकते हैं क्योंकि इन लोगों ने अंग्रेजों की तरह देश को लूटा है। हम पीएम मोदी और उनके गठबंधन द्वारा लोकतांत्रिक प्रणाली की इस तरह सरेआम हत्या किए जाने की कड़ी निंदा करते हैं।"
उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे गए पत्र पर कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने कहा कि उन्हें स्पीकर से ज्यादा उम्मीद नहीं है। क्योंकि वे वही करते हैं जो पीएम मोदी और अमित शाह कहते हैं। संसद में अध्यक्ष की स्वायत्तता खत्म हो चुकी है।
वहीं, भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम से खुद को पूरी तरह अलग बताया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि उद्धव ठाकरे के सांसद या विधायक कहां जाते हैं, इससे भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर उनके नेता और जनप्रतिनिधि लगातार पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं।
बावनकुले ने संजय राउत के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि किसी सांसद या विधायक पर पैसे लेकर पक्ष बदलने का आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी नेता के पार्टी छोड़ने के पीछे वास्तविक कारणों की जांच होनी चाहिए, लेकिन इसमें हमारे नेताओं की कोई भूमिका नहीं है। भाजपा को इसमें बेवजह घसीटा जा रहा है।
शिवसेना (शिंदे गुट) नेता संजय निरुपम ने भी उद्धव ठाकरे की पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) धीरे-धीरे समाप्त हो रही है और उसके नेताओं तथा कार्यकर्ताओं का नेतृत्व पर भरोसा खत्म हो चुका है। निरुपम ने दावा किया कि 2029 तक यह पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी से रोज लोग जा रहे हैं और सांसदों का जाना भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न शिंदे गुट को सौंप दिया था, जबकि उद्धव ठाकरे की पार्टी को 'मशाल' चुनाव चिह्न और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) मिला था। अब लोक सभा सांसदों में संभावित बगावत को ठाकरे खेमे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।