
Disha Salian Case: दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की मौत के मामले में उनके पिता सतीश सालियान के उस दावे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सीबीआई की एफआईआर में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे के साथ सूरज पंचोली और रिया चक्रवर्ती के नाम भी हैं। इस मामले पर अब शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। राउत ने मुंबई पुलिस की जांच पर भरोसा जताते हुए आदित्य ठाकरे का इस मामले से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।
उद्धव ठाकरे के करीबी सहयोगी संजय राउत ने कहा कि उन्होंने अब तक इस संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की थी, क्योंकि यह एक बेहद संवेदनशील मामला है। यह एक युवती की मौत और उसके परिवार पर पड़े गंभीर आघात से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान की मौत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी और मुंबई पुलिस ने इस मामले की कई बार जांच की है। मुंबई पुलिस की ईमानदारी और जांच पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार नहीं है। संजय राउत ने दावा किया कि मुंबई पुलिस की जांच में आदित्य ठाकरे का इस मामले से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं पाया गया था। मुंबई पुलिस ने लगाए गए सभी आरोपों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की थी और परिवार को न्याय दिलाने की कोशिश की थी।
राउत ने दावा किया कि जब राज्य में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री और गृह मंत्री थे, उसी दौरान मुंबई पुलिस ने जांच पूरी कर क्लोजर रिपोर्ट सौंपी थी। उस जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि आदित्य ठाकरे का इस घटना से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई सबूत मिला है।
राउत ने कहा, "जांच में आदित्य ठाकरे का इस मामले से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं पाया गया। उनके खिलाफ कोई ऐसा सबूत नहीं है, जिससे उन्हें इस मामले से जोड़ा जा सके।"
राउत ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि बार-बार इस मामले को राजनीतिक उद्देश्य से उठाया जा रहा है और इससे दिशा सालियान तथा उनके परिवार की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा, "यह मामला अब राजनीतिक अखाड़ा बन गया है। महाराष्ट्र की संस्कृति को यह शोभा नहीं देता। बार-बार इस मामले को उठाकर उस लड़की और उसके परिवार की बदनामी की जा रही है।"
राउत ने आगे आरोप लगाया कि ठाकरे परिवार की महाराष्ट्र और मराठी लोगों के बीच मजबूत छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए बदनामी का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) इस तरह के अभियान के खिलाफ लड़ती रहेगी।
संजय राउत ने यह भी कहा कि अगर सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है तो उसे निष्पक्ष तरीके से जांच करनी चाहिए और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण वह हर सवाल का जवाब नहीं देंगे।
राउत ने कहा कि उनकी पार्टी और ठाकरे परिवार पर लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं, लेकिन वे इन परिस्थितियों से निकलकर आगे बढ़े हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे शिवसेना मामलों के संभावित फैसलों का भी जिक्र किया और दावा किया कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
आदित्य ठाकरे का नाम घसीटे जाने का कारण बताते हुए संजय राउत ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे ने सरकार के खिलाफ जो मुहिम छेड़ रखी है और बीएमसी (BMC) के घोटालों को उजागर कर रहे हैं, उससे सरकार बौखला गई है और उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, परिसीमन (Delimitation) को समर्थन देने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
संजय राउत ने एफआईआर के कथित तौर पर कुछ पन्ने सामने आने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर एफआईआर 16 पन्नों की है तो उसका केवल एक पन्ना ही सार्वजनिक रूप से कैसे सामने आया? राउत ने दावा किया कि रविवार को सह्याद्री गेस्ट हाउस में एक बैठक हुई थी। इसके बाद दो बड़े नेता एक ही कार से गए। इसी बैठक तथा यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं के बाद एफआईआर के कुछ हिस्से सामने आए। यह आरोप नहीं लगा रहा हूं, बल्कि जो वास्तविकता है, वही बता रहा हूं। 16 पन्नों की एफआईआर में से सिर्फ एक पन्ना बाहर कैसे आया, यह सवाल महत्वपूर्ण है।