मुंबई

एकनाथ शिंदे का मास्टरस्ट्रोक: बच्चू कडू शिवसेना में शामिल, ‘प्रहार’ के साथ आने से मिली नई धार

Bachchu Kadu joins Shiv Sena: महाराष्ट्र की राजनीति से बड़ी खबर है। प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक और पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू के शिवसेना में शामिल होने से एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ताकत विदर्भ क्षेत्र में काफी बढ़ गई है।

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Apr 30, 2026
Bachchu Kadu joins Shiv Sena Eknath Shinde
शिवसेना में शामिल हुए बच्चू कडू (Photo: X/@RealBacchuKadu)

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है। प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और विदर्भ के फायरब्रांड नेता बच्चू कडू ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। मुंबई में शिंदे की मौजूदगी में 'धनुष-बाण' थामते हुए बच्चू कडू ने स्पष्ट कहा कि वह अब अपनी आगे की राजनीतिक यात्रा शिवसेना के साथ ही जारी रखेंगे। बच्चू कडू के पार्टी में शामिल होते ही एकनाथ शिंदे ने उन्हें विधान परिषद चुनाव (MLC) के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया।

बच्चू कडू की 'घर वापसी', बोले- सभी शर्तें मानी गई

शिवसेना का दामन थमने के बाद मीडिया से बातचीत में बच्चू कडू ने कहा कि उन्होंने यह फैसला तब लिया जब शिवसेना शिंदे गुट ने उनकी सभी शर्तें मान लीं। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए उपज पर समर्थन मूल्य में सुधार, विधवा महिलाओं के मुद्दे और दिव्यांग मंत्रालय को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी है।

पूर्व राज्य मंत्री बच्चू कडू ने कहा कि वह पूरी ईमानदारी से शिवसेना की ताकत बढ़ाने के लिए काम करेंगे, लेकिन इसके साथ ही किसानों, मजदूरों और दिव्यांगों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

‘अब 15-20 साल शिवसेना में ही रहूंगा’

बच्चू कडू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब उनका बाकि का राजनीतिक भविष्य शिवसेना के साथ ही जुड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति की शुरुआत शिवसेना से हुई थी और अब वह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, मैं वादा करता हूं कि अगले 15-20 वर्षों तक जो मेरी राजनीति यात्रा बची है, वह शिवसेना के साथ ही होगी।

प्रहार संगठन का क्या होगा?

प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक बच्चू कडू के इस फैसले के बाद उनकी पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रहार की सामाजिक और दिव्यांग शाखाएं पहले की तरह काम करती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीति करना चाहते हैं, वे शिवसेना में शामिल होंगे, जबकि सामाजिक कार्य करने वाले प्रहार संगठन के साथ बने रहेंगे।

क्यों छोड़ी थी पहले शिवसेना?

बच्चू कडू ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले शिवसेना क्यों छोड़ी थी। उनके मुताबिक, किसानों के मुद्दों खासकर कपास के समर्थन मूल्य को लेकर असहमति के चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया था। अब एक बार फिर उन्होंने किसानों और दिव्यांगों के मुद्दों को केंद्र में रखते हुए शिवसेना में वापसी की है।

विदर्भ में बदला सियासी समीकरण

बच्चू कडू की शिवसेना में एंट्री को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे खासकर विदर्भ क्षेत्र के सियासी समीकरण और दिलचस्प होने की संभावना है।

Published on:
30 Apr 2026 03:49 pm
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