
Gokul Milk Union Controversy: महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित गोकुल दूध संघ को लेकर महायुति सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। सहकार कानून में बदलाव कर गोकुल के संचालक मंडल में पांच सदस्यों की नियुक्ति के सरकार के फैसले पर कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूर्वव्यापी प्रभाव से कानून लागू कर किसानों द्वारा चुनी गई सत्ता छीनने की कोशिश कर रही है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि गोकुल को अमूल के नियंत्रण में देने की तैयारी चल रही है।
कोल्हापुर के इस बड़े सहकारी दूध संघ के संचालक मंडल में पांच सदस्यों को नामित करने के महायुति सरकार के फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इनमें चार सदस्यों को मतदान का अधिकार दिए जाने का प्रावधान है। कांग्रेस विधायक और गोकुल चुनाव में जीत हासिल करने वाले पैनल के प्रमुख सतेज पाटिल ने इसे किसानों के जनादेश के खिलाफ बताया है।
मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सतेज पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कानून में बदलाव कर उसे पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू करने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य गोकुल में किसानों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सत्ता से बाहर रखना है।
गोकुल दूध संघ के हाल ही में संपन्न पंचवर्षीय चुनाव में कांग्रेस विधायक सतेज पाटिल की राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी ने 25 में से 13 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, महायुति के पैनल को 12 सीटों से संतोष करना पड़ा था।
इस चुनाव में महायुति ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन उसे बहुमत नहीं मिल पाया। सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि चुनाव में मिली हार को स्वीकार करने के बजाय अब सरकार कानून में बदलाव करके सत्ता का समीकरण बदलना चाहती है।
सतेज पाटिल ने गोकुल दूध संघ के महत्व को बताते हुए कहा कि इससे करीब साढ़े पांच लाख किसानों का परिवार जुड़ा हुआ है। हर 10 दिन में किसानों को उनके दूध का लगभग 100 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है।
उन्होंने बताया कि गोकुल रोजाना करीब 20 लाख लीटर दूध एकत्र करता है। अमूल के यह देश का सबसे बड़ा दूध संघ है।
पाटिल ने कहा कि इतनी बड़ी सहकारी व्यवस्था किसानों की मेहनत और भरोसे पर खड़ी हुई है। इसके बावजूद महायुति सरकार किसानों द्वारा चुनाव में दिए गए जनादेश को नकारने का काम कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महायुति सरकार केवल संचालक मंडल में कुछ सदस्यों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गोकुल की सत्ता पर नियंत्रण हासिल करने की मंशा है।
कांग्रेस विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए महाराष्ट्र सरकार के मंत्री हसन मुश्रीफ और चंद्रकांतदादा पाटिल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोकुल में पांच नामित संचालकों की नियुक्ति का पूरा षड्यंत्र इन्हीं दोनों नेताओं ने रचा है।
सतेज पाटिल ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों की ओर से भी कानून में बदलाव को मौन सहमति मिलती दिखाई दी। मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले का किसी ने विरोध नहीं किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सतेज पाटिल ने गोकुल के उत्पादों का जिक्र करते हुए महायुति सरकार पर व्यंग्य भी किया। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा था, "मैं आते समय गोकुल के गुलाब जामुन और श्रीखंड लाने वाला था, लेकिन रह गया। अब गोकुल के नाम वाले उत्पाद आखिरी बार देख लीजिए, क्योंकि उन पर अमूल का स्टिकर लगाकर गोकुल को उनके हवाले करने की कोशिश की जा रही है।"
गोकुल दूध संघ का चुनाव अब महाराष्ट्र की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस चुनाव को लेकर 'एक्स' पर पोस्ट किया था।
इसके बाद सतेज पाटिल ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की मंशा धीरे-धीरे गोकुल की पहचान मिटाकर उसे अमूल के हाथों में सौंपने की है।