मुंबई

राज ठाकरे पर भड़की भीम आर्मी, कहा- साहिल वाकोडे मामले में माफी मांगें, नहीं तो आएंगे शिवाजी पार्क

IIT Bombay Prof Suryanarayana Doolla: आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इस पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे की टिप्पणी पर भीम आर्मी ने विरोध जताया है माफी मांगने की चेतावनी दी है।
3 min read
Sep 24, 2026
Bhim Army warn Raj Thackeray
राज ठाकरे और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण (Photo: IANS)

Sahil Wakode Case IIT Powai: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई में बीटेक के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। साहिल के परिवार ने संस्थान में उसके साथ जातिगत दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और BNS की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसी बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे की इस मामले पर की गई टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

जाति-पाति की राजनीति से दूर रहें छात्र- ठाकरे

राज ठाकरे ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साहिल वाकोडे की मौत को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी वजह थी, जिसके कारण साहिल को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। ठाकरे ने शिक्षा व्यवस्था में मौजूद खामियों और विद्यार्थियों पर बढ़ते तनाव को इस घटना के संदर्भ में महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि जाति और धर्म का इस्तेमाल लोगों को मूल मुद्दों से भटकाने के लिए किया जा रहा है। राज ठाकरे ने विद्यार्थियों से जाति-पाति की राजनीति में नहीं उलझने की अपील की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करना साहिल और तनाव के कारण जान गंवाने वाले अन्य विद्यार्थियों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

भीम आर्मी का कड़ा रुख- 2 दिन में माफी मांगें राज ठाकरे

राज ठाकरे की इस टिप्पणी पर भीम आर्मी महाराष्ट्र ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि साहिल के परिवार ने जातिगत उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं और इन आरोपों को महज 'जातीय राजनीति' के तौर पर खारिज करना उचित नहीं है।

चंद्रशेखर आजाद रावण की अगुवाई वाली भीम आर्मी ने कहा कि मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया है और जांच अभी जारी है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले जातिगत उत्पीड़न के आरोपों को नकारने के बजाय उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच की जानी चाहिए।

संगठन ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था का दबाव और जातीय भेदभाव दो अलग-अलग मुद्दे हैं। शैक्षणिक तनाव की जांच के साथ-साथ साहिल के परिवार की ओर से लगाए गए जातीय दुर्व्यवहार के आरोपों को भी समान गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

'मृत्यु का सच जांच से सामने आना चाहिए'

भीम आर्मी महाराष्ट्र ने कहा कि साहिल की मौत के वास्तविक कारणों का पता निष्पक्ष जांच से लगना चाहिए। संगठन ने कहा कि साहिल महाराष्ट्र का एक युवा छात्र था और उसके परिवार की ओर से उठाए गए सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

संगठन ने राज ठाकरे से अपनी टिप्पणी पर पुनर्विचार करने और साहिल वाकोडे के परिवार से माफी मांगने की मांग की है। भीम आर्मी ने दो दिनों के भीतर राज ठाकरे से अपनी भूमिका स्पष्ट करने को कहा है। ऐसा नहीं होने पर शिवाजी पार्क स्थित मनसे कार्यालय के बाहर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।

हॉस्टल के कमरे में मृत मिला था साहिल

पुलिस के अनुसार, ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक द्वितीय वर्ष में पढ़ने वाले 22 वर्षीय साहिल वाकोडे को 18 सितंबर की शाम पवई परिसर स्थित हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था। बताया गया है कि यह घटना मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ घंटे बाद हुई। आरोप है कि वह परीक्षा के दौरान चैटजीपीटी का इस्तेमाल नकल के लिए कर रहा था। प्रोफेसर डुल्ला ने ही साहिल को पकड़ा था, उस समय वह परीक्षा पर्यवेक्षक थे।

उधर, साहिल के माता-पिता का दावा है कि उनके बेटे ने उन्हें अपने साथ किए गए जातिगत दुर्व्यवहार के बारे में बताया था। परिवार की ओर से लगाए गए इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डुल्ला के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट और बीएनएस की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल साहिल वाकोडे की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की पुलिस जांच कर रही है।

Updated on:
24 Sept 2026 11:29 am
Published on:
24 Sept 2026 09:50 am