
Iran attack Indian seafarer case: ईरान हमले में मारे गए भारतीय नाविक का मामला सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अनखाड़ की पीठ ने की। इस मामले में दीक्षित सोलंकी के पिता और बहन ने अधिकारियों के काम करने के ढंग पर सवाल खड़े किए। इस मामले में परिवार वालों ने अपने ही बेटे की पहचान को लेकर कोर्ट के दरवाजे खटखटाए हैं। ताबूत में पूरे शरीर की जगह सिर्फ कुछ जली हुई हड्डियां मिलने से परिवार सदमे और असमंजस में है।
जानकारी के अनुसार 1 मार्च को तेल ले जा रहे टैंकर MT MKD Vyom पर हमला हुआ था। इस हमले में 25 साल के भारतीय नाविक दीक्षित सोलंकी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि ओमान के पास एक विस्फोटक से भरी ड्रोन बोट टैंकर से टकरा गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। लेकिन इस हादसे के बाद परिवार वालों को अधिकारियों ने अलग-अलग जानकारी दी। पहले कहा गया कि दीक्षित घायल है। उसके बाद उन्हें कहा गया कि वह लापता और फिर अंत में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस तरह लगातार बदलती जानकारी ने परिवारजनों को असमंजस में डाल दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि भारतीय दूतावास की मदद से बड़ी कठिनाइयों के बाद अवशेष भारत लाए गए। लेकिन शवपेटी खोलने पर उन्हें बड़ा झटका लगा, क्योंकि उसमें पूरा शरीर नहीं था। ताबूत में सिर्फ चार से पांच जली हुई हड्डियां थीं। अवशेष देखकर उन्हें यह विश्वास नहीं हो पाया कि ये अवशेष उनके बेटे के ही हैं। इसी वजह से उन्होंने साफ कहा कि बिना DNA जांच के वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
याचिका में अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा गया कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी सम्मान का अधिकार है। साथ ही परिवार को अपने सदस्य के सही अवशेष मिलने चाहिए जिससे वे अपने रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर सकें। सुनवाई के दौरान बताया गया कि दीक्षित के अवशेष अभी शिपिंग कंपनी के पास हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि 6 अप्रैल को शिपिंग महानिदेशालय की ओर से एक ईमेल भेजा गया था, जिसमें DNA टेस्ट की जरूरत मानी गई थी, लेकिन अब तक इस प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने नहीं आए हैं। दीक्षित के पिता ने साफ कहा है कि बिना वैज्ञानिक पुष्टि वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से देखते हुए केंद्र सरकार और शिपिंग महानिदेशालय से जवाब मांगा है कि ऐसी स्थिति में क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें न तो पूरी जानकारी दी गई और न ही जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। फिलहाल कोर्ट ने अगली सुनवाई तय की है और इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।